क्या आपको मालूम है? कितनी होगी अफगानिस्तान के राष्ट्रप्रमुख और मंत्रियों की सैलरी  – do u know? how much will be the salary of the head of state and ministers of afghanistan | क्या आपको मालूम है? कितनी होगी अफगानिस्तान के राष्ट्रप्रमुख और मंत्रियों की सैलरी  –

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डिजिटल डेस्क, काबुल। अफगानिस्तान पर तालिबान को कब्जा किए हुए लगभग एक माह हो गये हैं। तालिबान ने अफगानिस्तान में 33 सदस्यीय अस्थायी सरकार का गठन किया है। मोहम्मद हसन अखुंद को अफगानिस्तान का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। आखिर क्या होगी सरकार में शामिल इन लोगों की सैलरी?
अगर अफगानिस्तान में अशरफ गनी सरकार को देखा जाए तो इस सरकार के मुखिया यानि राष्ट्रपति और दूसरे मंत्री भारी भरकम सैलरी पाते थे। इसके अलावा सरकारी अफसरों और मुलाजिमों की तनख्वाह भी ठीक थी। अगर भारत से अफगानिस्तान की तुलना की जाए तो अफगानिस्तान अपने देश से कहीं ज्यादा सस्ता है। फिलहाल अफगानिस्तान की मुद्रा 01 अफगानी भारत के 85 पैसे के बराबर है। अब आइए जानते हैं, कि अशरफ गनी सरकार में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मंत्रियों को कितना वेतन मिलता था।

पिछली सरकार में राष्ट्रपति गनी को मिलती थी सैलरी

 

बता दें कि अशरफ गनी वर्ष सितंबर 2014 में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति बने थे। वो करीब 07 साल इस पद पर रहे। 15 अगस्त को तालिबान फौज के काबुल में घुसने के बाद वो देश छोड़कर भाग गए थे। आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि गनी की सैलरी 13,400 डॉलर थी। यानि अफगानी मुद्रा में करीब 11.5 लाख अफगान। इसे अगर भारतीय मुद्रा में बदलें तो ये 9.83 लाख रुपए होगी। अशरफगनी एशियाई मुल्कों में शानदार सैलरी पाने वाले राष्ट्रप्रमुखों में थे।

कितनी होगी तालिबानी प्रधानमंत्री की सैलरी

अब ये देखने वाली बात होगी कि तालिबान सरकार अपना वेतन कितना तय करती है। अगर ये पिछले सरकार की तरह हुआ तो अफगानिस्तान के प्रधानमंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद की सैलरी हर महीने 10-11 लाख रुपए के आसपास होगी। वैसे अफगानिस्तान पर कृपा बरसाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का वेतन सालाना करीब 24 लाख रुपए है। यानि हर महीने करीब 02 लाख रुपए पाक पीएम की तनख्वाह है।

पिछली सरकार में उपराष्ट्रपति की सैलरी

अफगानिस्तान में पिछली सरकार में  अमरुल्लाह सालेह  उपराष्ट्रपति थे। उनका वेतन अफगानी करेंसी में 960,000 अफगानी था। यानि भारतीय मुद्रा के अनुसार 8.19 लाख रुपए। तालिबान सरकार में दो उपप्रधानमंत्री बनाए गए हैं। उनके नाम मुल्ला अब्दुल गनी बारादर और मुल्ला अब्दुल सलमान हनीफ हैं। उन्हें भी सरकारी आवास, सुरक्षा, वाहन के साथ ही करीब इतना ही वेतन मिलना चाहिए।

पूर्व सासंदों का वेतन व सुविधाएं

अफगानिस्तान की पिछली संसद 15 अगस्त 2021 को भंग हो चुकी है। पहले इस संसद के दो अंग थे। मशरानो जिरगा यानि हाउस ऑफ एल्डर्स, जिसके 102 सदस्य होते थे। संसद का दूसरा अंग थी वालेशी जिरगा यानि हाउस ऑफ पीपुल्स। जिसमें 250 संसद सदस्य थे। तब अफगानिस्तान में फिलहाल हर सांसद की सैलरी 195,000 अफगान अफगानी मुद्रा में थी। साथ में उन्हें फोन की सुविधा के साथ खाने की सुविधा दी जाती थी और दो सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराए जाते थे।

मंत्रियों का वेतन और सुविधाएं क्या थी?

अफगान सरकार के मंत्रियों को सांसदों से थोड़ा ज्यादा वेतन मिलता था। उन्हें आवास की सुविधा के साथ कार, सुरक्षा, फोन और ऑफिस की सुविधा उपलब्ध कराई जाती थी। तालिबान सरकार भी अपने सांसदों को इसी समकक्ष वेतन और सुविधाएं दे सकती है। 

 अफगानिस्तान में रहना, कितना सस्ता या महंगा है?

अफगानिस्तान में मकान का किराया महंगा है तो खाना,पीना आदि सस्ते. वहां कास्ट ऑफ लिविंग और किराया दोनों भारत से कम हैं। अनाज, अंडे, दूध  और मांस आदि सस्ते हैं। ड्राइफ्रूट्स बहुत सस्ते हैं व फल भी भारत की तुलना में काफी सस्ते हैं।



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