आंखों से जुड़ी बीमारी को हल्के में ना लें, हो सकती है डिमेंशिया की निशानी – स्टडी

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Eyes linked to Risk of Dementia : बढ़ती उम्र के साथ-साथ मेमोरी पॉवर कमजोर होने लगती है. आमतौर पर यह दिमाग के टिश्यूज को नुकसान पहुंचने से होता है. इसे व्यापक परिप्रेक्ष्य (Broad perspective) में मानसिक विकार अल्जाइमर (Alzheimer) कहा जाता है. और अल्जाइमर में सबसे ज्यादा यानी करीब 70 फीसद योगदान डिमेंशिया (Dementia) का होता है. अब डिमेंशिया को लेकर एक नई स्टडी सामने आई है. दैनिक जागरण में छपी खबर के अनुसार, इस स्टडी में दावा किया गया है कि डिमेंशिया का आंख की बीमारी से गहरा संबंध हो सकता है और यह इस बीमारी की पहली निशानी हो सकती है. स्टडी के अनुसार, डिमेंशिया के हाई रिस्क का ताल्लुक उम्र संबंधी मैक्यूलर डीजेनरेशन, मोतियाबिंद और डायबिटीज से जुड़े आंख रोग से हो सकता है. उम्र बढ़ने के साथ आंख संबंधी इस तरह की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.

स्टडी के मुताबिक, उम्र संबंधी मैक्यूलर डीजेनरेशन बीमारी (Macular degeneration disease) के चलते आंखों में रेटिना का सेंटर कमजोर हो जाता है. और इसके बाद नज़र का कमजोर होना इसका मुख्य लक्षण है. जबकि डिमेंशिया में किसी व्यक्ति की याद रखने, सोचने या निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होने लगती है. इससे पीडि़त व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन में दिक्कतें आने लगती हैं. आमतौर पर डिमेंशिया 65 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोगों में होता है.

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ब्रिटिश जर्नल आफ आपथैल्मोलाजी में इस स्टडी (https://bjo.bmj.com/) के नतीजों को प्रकाशित किया गया है. रिसर्चर्स ने यह निष्कर्ष 55 से 73 वर्ष के 12 हजार 364 लोगों के डाटा के विश्लेषण के आधार पर निकाला है. यूके बायोबैंक की स्टडी में शामिल किए गए इन प्रतिभागियों पर वर्ष 2006 से लेकर 2021 के शुरू तक नजर रखी गई. इस अवधि में डिमेंशिया के 2,304 मामले पाए गए.

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स्टडी में किए गए डाटा विश्लेषण में मैक्यूलर डीजेनरेशन, मोतियाबिंद और डायबिटीज संबंधी आंख रोग का संबंध डिमेंशिया के हाई रिस्क से पाया गया. हालांकि ग्लूकोमा से इसका कोई जुड़ाव नहीं पाया गया. रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल इससे ग्रस्त लोगों की संख्या दुनियाभर में 2.4 करोड़ है और हर 20 साल में इनकी संख्या दोगुनी होने का अनुमान है. डिमेंशिया किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि ये कई बीमारियों या यूं कहें कि कई लक्षणों के एक समूह का नाम है.

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