पिघल रहा आइलैंड: ग्रीनलैंड की सबसे ऊंची चोटी पर पहली बार हुई मूसलाधार बारिश, बर्फ के पिछलने की दर रोजाना के मुकाबले 7 गुना तक बढ़ी; वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी

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  • The World’s Largest Island Received Torrential Rain For The First Time, The Last Snow Raised The Concern Of Scientists; Said, This Is Surprising

3 घंटे पहले

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ग्रीनलैंड की सबसे ऊंची चोटी पर पहली बार हुई मूसलाधार बारिश ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। नेशनल साइंस फाउंडेशन समित स्टेशन के मुताबिक, 14 अगस्त को पहली बार 10,551 फीट ऊंचे शिखर पर 7 करोड़ टन पानी गिरा है। इतनी बारिश होने के कारण यहां बर्फ की चादरें टूटकर बिखर गईं।

1950 से जब से यहां का तापमान रिकॉर्ड करना शुरू किया गया है, तब से पहली बार है जब बर्फ के पिघलने की दर रोजाना से 7 गुना तक ज्यादा थी।

ग्रीनलैंड तेज से पिघल रहा
अमेरिका के नेशनल स्नो एंड आइस डाटा सेंटर (NSIDC) की रिपोर्ट कहती है, 14 अगस्त बारिश के कारण 8.72 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में बर्फ पिघल गई थी। NSIDC के रिसर्चर टेड स्कैमबोस का कहना है, इतने ऊंचे शिखर पर पहले कभी इतनी बारिश नहीं हुई। इस बारिश के कारण जितनी बर्फ पिछली है, उतनी बर्फ तो आमतौर पर हफ्तों सा सालभर में पिछलती है। पर्यावरण में जिस तरह से बदलाव हो रहे हैं उससे ग्रीनलैंड तेजी से पिछल रहा है।

ग्रीनलैंड की सबसे ऊंची चोटी पर हुई बारिश का कारण है एंटीसाइक्लोन। एंटीसाइक्लोन एक दबाव वाला क्षेत्र होता है जब हवा नीचे की तरफ दबने पर गर्म हो जाती है। ऐसा होने पर दबाव बनता है और बारिश हो जाती है।

जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चिंता
टेड स्कैमबोस का कहना है, पिछले 20 सालों में जलवायु में इतना बदलाव हो चुका है कि तापमान और बारिश जैसे फैक्टर्स के बारे में सटीक पता लगाना मुश्किल हो गया है। दुनियाभर में जलवायु और पर्यावरण जिस तरह से गर्म हो रहे हैं, उसकी सीमा पार हो चुकी है। दुनियाभर में वायु प्रदूषण इतना ज्यादा बढ़ता जा रहा है कि बर्फ वाले इलाकों के खतरा बढ़ रहा है। ये पिछल रहे हैं। यह हैरत में डालने वाली बात है।

जुलाई में खतरनाक स्तर पर पिछली थी बर्फ
ग्रीनलैंड में इसी साल जुलाई में भी खतरनाक स्तर पर बर्फ पिछली थी। यहां 937 करोड़ टन बर्फ हर दिन पिछली। वैज्ञानिकों के मुताबिक, गर्मी के दिनों में बर्फ पिघलने का स्तर दोगुने से भी ज्यादा था। एक अनुमान के मुताबिक, ग्रीनलैंड की सारी बर्फ पिछल जाती है तो धरती पर मौजूद सागरों का पानी 20 फीट तक बढ़ सकता है।

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