कैसे हुआ नारायण राणे और उद्धव ठाकरे के बीच 36 का आंकड़ा? पढ़ें इनसाइड स्टोरी

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Uddhav Thackeray vs Narayan Rane: केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता नारायण राणे ने उद्धव ठाकरे को ‘थप्पड़’ लगाने की बात कही जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. महाराष्ट्र भर में 4 जगह उनके खिलाफ एफआईआर हुई और शिव सैनिकों ने उनके घर के बाहर हमला कर दिया. राणे जमानत पर बाहर आ गये हैं और उनके बेटे नितेश ने फिल्म राजनीति का डायलॉग ट्वीट किया है, “करारा जवाब मिलेगा.” दरअसल भले ही ये लड़ाई महाराष्ट्र में दोस्त से दुश्मन बनी शिव सेना और बीजेपी के बीच की लग रही हो लेकिन झगड़ा नारायण राणे और उद्धव ठाकरे के बीच जाती खुन्नस का भी है.

70 के दशक में मुंबई के चेंबूर इलाके से शिव सेना का झंडा थामकर अपना सियासी सफर शुरू करने वाले नारायण राणे 1995 तक पार्टी में बेहद ताकतवर नेता बनकर उभरे. उस साल बनी मनोहर जोशी की सरकार में राणे को राजस्व मंत्री बनाया गया. राणे एक बेहद आक्रमक छवि वाले और वफादार नेता तो थे ही उनके पास पार्टी की तिजोरी भरने का भी कौशल था. राणे का मराठा होना भी शिव सेना में उनकी हैसीयत के लिये फायदेमंद था. वे उस कोंकण इलाके से आते हैं जिसे शिव सेना का गढ़ माना जाता है.

1999 में जब बाल ठाकरे ने मनोहर जोशी को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया तब ये कुर्सी उन्होने नारायण राणे को देने का फैसला किया. लेकिन राणे ज्यादा दिनों तक मुख्यमंत्री नहीं रह सके थे. उसी साल चंद महीनों बाद हुए विधान सभा चुनाव के बाद शिव सेना-बीजेपी गठबंधन आपसी विवाद की वजह से वक्त रहते सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर पाया और महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार आ गई.

इस बीच शिव सेना में भी बदलाव हो रहे थे. बाल ठाकरे के सबसे छोटे बेटे उद्धव ठाकरे राजनीति में सक्रीय हो चुके थे और उन्हें शिव सेना का कार्याध्यक्ष बनाया गया था. राणे जैसे पार्टी के पुराने लोग दिन ब दिन खुद को साइडलाइन किया जाना महसूस कर रहे थे. 2004 के विधान सभा टिकट बंटवारे में भी राणे के बजाय उद्धव ठाकरे की चली. इससे खफा होकर राणे ने न केवल उद्धव ठाकरे बल्कि उनके सेक्रेटरी मिलिंद नार्वेकर, पार्टी के वरिष्ठ नेता सुभाष देसाई और बाल ठाकरे के खिलाफ भी सरेआम बयानबाजी शुरू कर दी. जुलाई 2005 में उन्होंने एलान किया कि वे शिव सेना नेता पद से इस्तीफा दे रहे हैं. इस घोषणा के वक्त राणे ने कहा कि शिव सेना ने उद्धव के नेतृत्व में अपनी चमक खो दी है. बाल ठाकरे के बारे में उन्होने कहा कि पुत्रमोह की वजह से उनकी नजर में बाकी किसी की अहमियत नहीं रह गई. मिलिंद नार्वेकर और सुभाष देसाई पर राणे ने आरोप लगाया कि वे बीते चार से पांच सालों से उनके खिलाफ साजिश रच रहे थे. राणे की बयानबाजी से भड़क कर बाल ठाकरे ने उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर दिया.

शिव सेना से निकाले जाने के बाद राणे कांग्रेस से जुड़ गये. शिव सेना के प्रति उनकी नफरत को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें 2015 के विधान सभा उप चुनाव में बांद्रा पूर्व सीट से बतौर उम्मीदवार उतारा लेकिन उसमें उनकी बुरी तरह से हार हुई. राणे के मुताबिक उन्हें कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बनाने का झांसा दिया था. लेकिन जब भी कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री चुने जाने का अवसर आता तो कभी अशोक चव्हाण मुख्यमंत्री बना दिये जाते तो कभी पृथ्वीराज चव्हाण. कांग्रेस को भी बुरा-भला कहते हुए उन्होने उस पार्टी को भी छोड़ दिया.

साल 2017 में उन्होंने महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष नाम की अपनी अलग पार्टी बना ली. उस दौरान महाराष्ट्र की सत्ता में बीजेपी और शिव सेना साथ तो थे लेकिन उनके बीच की कटुता सियासी हलकों में साफ नजर आ रही थी. बीजेपी उस कोंकण में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिये नारायण राणे को लेना चाहती थी जहां सालों से शिव सेना का वर्चस्व था.

लेकिन बीजेपी सीधे सीधे शिव सेना को नाराज नहीं करना चाहती थी, इसलिये, राणे को बिना पार्टी में शामिल किये बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य बना दिया. जब शिव सेना से टकराव बढ़ा तो राणे और उनके बेटे नितेश औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गये. अपने बयानों के जरिये बाप-बेटे लगातार शिव सेना पर निशाना साधते रहे. राणे के बड़े बेटे निलेश ने ये बयान देकर सनसनी फैला दी कि उन्हें पता है कि ठाकरे के बंगले मातोश्री की प्रत्येक मंजिल पर क्या होता है और अगर उन्होंने सच्चाई बता दी तो ठाकरे कहीं मुंह छुपाने लायक नहीं रहेंगे. निलेश ने आरोप लगाया था कि ठाणे के शिव सेना नेता आनंद दिघे की मौत के पीछे बाल ठाकरे का हाथ था और ठाकरे ने बॉलीवुड के मशहूर गायक सोनू निगम की हत्या की भी साजिश रची थी. जून 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह की मौत के बाद नारायण राणे ने आरोप लगाया कि उनकी हत्या की गई है और उसमें महाराष्ट्र सरकार का एक मंत्री शामिल है.

उद्धव को ‘थप्पड़’ मारने वाले बयान के दो दिनों पहले ही राणे के एक और बयान ने सनसनी फैला दी थी और इस बात की चर्चा छेड़ दी थी कि क्या शिव सेना में बगावत होने वाली है. राणे ने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार में नगरविकास मंत्री और दिग्गज नेता एकनाथ शिंदे शिव सेना से ऊब गये हैं और वे उन्हें बीजेपी से जुड़ने का ऑफर देंगे. महाराष्ट्र में मुंबई समेत 10 महानगरापालिकाओं के चुनाव अगले साल होने जा रहे हैं जिन्हें जीतेने के लिये सभी पार्टियां एड़ी चोटी का जोर लगाने वाली हैं. ऐसे में नारायण राणे बनाम उद्धव ठाकरे की लड़ाई के कई और अध्याय देखने मिल सकते हैं.

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