पीएम मोदी ने लगातार 8वीं बार लाल किले की प्राचीर से फहराया तिरंगा, अब देश को संबोधित कर रहे हैं

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Independence Day 2021: देश आज अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लगातार आठवीं बार लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराया है. धवजारोहण के वक्त 21 तोपों की सलामी भी दी गई. थलसेना की 2233 फील्ड बैटरी (सेरिमोनियल) इन तोपों की सलामी दी. धवजारोहण के वक्त थलसेना, वायुसेना, नौसेना और दिल्ली पुलिस की अलग-अलग टुकड़ियों ने राष्ट्र-सैल्यूट दिया. ध्वजारोहण के तुरंत बाद भारतीय वायु‌सेना के दो मी-17 हेलीकॉप्टर ‘अमृोत फॉरमेशन में’ फूलों की बौछार की. ऐसा पहली बार हुआ. 

लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत शुभकामनाओं के साथ की. पीएम मोदी ने कहा, “आजादी का अमृत महोत्सव, 75वें स्वतंत्रता दिवस पर आप सभी को और विश्वभर में भारत को प्रेम करने वाले, लोकतंत्र को प्रेम करने वाले सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं.”

आगे पीएम मोदी ने कहा, “कोरोना वैश्विक महामारी में हमारे डॉक्टर, हमारे नर्सेस, हमारे पैरामेडिकल स्टाफ, सफाईकर्मी, वैक्सीन बनाने मे जुटे वैज्ञानिक हों, सेवा में जुटे नागरिक हों, वे सब भी वंदन के अधिकारी हैं. भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू जी हों, देश को एकजुट राष्ट्र में बदलने वाले सरदार पटेल हों या भारत को भविष्य का रास्ता दिखाने वाले बाबासाहेब अम्बेडकर, देश ऐसे हर व्यक्तित्व को याद कर रहा है, देश इन सबका ऋणी है.”

75वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें-

  • हम आजादी का जश्न मनाते हैं, लेकिन बंटवारे का दर्द आज भी हिंदुस्तान के सीने को छलनी करता है. यह पिछली शताब्दी की सबसे बड़ी त्रासदी में से एक है. कल ही देश ने भावुक निर्णय लिया है. अब से 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में याद किया जाएगा.
  • हर देश की विकासयात्रा में एक समय ऐसा आता है, जब वो देश खुद को नए सिरे से परिभाषित करता है, खुद को नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ाता है. भारत की विकास यात्रा में भी आज वो समय आ गया है.
  • भारत ने सदियों तक मातृ-भूमि, संस्कृति और आजादी के लिए संघर्ष किया है. आजादी की ललक इस देश ने सदियों तक छोड़ी नहीं. जय-पराजय आते रहे, लेकिन मन मंदिर में बसी आजादी की आकांक्षा कभी खत्म नहीं होने दी.
  • यहां से शुरू होकर अगले 25 साल की यात्रा जब हम आजादी की शताब्दी मनाएंगे, नए भारत के सृजन का ये अमृत काल है. इस अमृत काल में हमारे संकल्पों की सिद्धि हमें आजादी के 100 साल तक ले जाएगी, गौरवपूर्ण रूप से ले जाएगी.
  • संकल्प तब तक अधूरा होता है, जब तक संकल्प के साथ परिश्रम और पराक्रम की पराकाष्ठा न हो. इसलिए हमें हमारे सभी संकल्पों को परिश्रम और पराक्रम की पराकाष्ठा करके सिद्ध करके ही रहना है.
  • हमें अभी से जुट जाना है. हमारे पास गंवाने के लिए एक पल भी नहीं है. यही समय है, सही समय है. बदलते हुए युग के अनुकूल हमें भी अपनेआप को ढालना होगा. सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास इसी श्रद्धा के साथ हम सब जुट चुके हैं.

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