अफगानिस्तान में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज: तालिबान की धमकी- 31 तक निकलो; अमेरिका ने 24 घंटे में 89 विमानों से 16 हजार लोग निकाले

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एक घंटा पहले

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तस्वीर काबुल एयरपोर्ट के बाहर की है। यहां भीड़ को नियंत्रित कर लोगों को एयरपोर्ट में एंट्री करा रहे नाटो सेना के कंटेनरों पर तालिबानी सवार हो गए। हालांकि दोनों ओर से सहयोग देखा गया।

  • मिशन तेज – अमेरिका ने पिछले हफ्ते निकाले थे 17 हजार, इतने 1 दिन में ही निकाले

तालिबानी कब्जे के बाद अफगानिस्तान में 9 दिन से चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन सोमवार को कई गुना तेज हो गया। यह तेजी तालिबान की अमेरिका को दी गई धमकी के बाद आई है। अमेरिका ने लोगों को निकालने के लिए अपनी सेना के 25 सी-17, 3 सी-13 और 61 चार्टर्ड कमर्शियल प्लेन समेत 89 विमान लगा दिए। इनके जरिए उसने रविवार से सोमवार तक 24 घंटे में 16 हजार लोगोें को निकाल लिया।

अमेरिकी सेना के संयुक्त क्षेत्रीय अभियान के डिप्टी डायरेक्टर मेजर जनरल हैंक टेलर ने बताया कि ये पूरा अभियान 11 हजार जवानों की मदद से पूरा किया गया। रविवार से पहले तक एक हफ्ते मेें अमेरिका ने 17 हजार लोगों को निकाला था। उधर, जर्मनी और फ्रांस ने कहा है कि रेस्क्यू मिशन 31 अगस्त के बाद भी जारी रहना चाहिए, ताकि ज्यादा लोग निकाले जा सकें।

इससे पहले, तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन सैनिकों के 31 अगस्त तक अफगानिस्तान छोड़ने की बात कह चुके हैं। अगर इस तारीख से आगे एक दिन की भी मोहलत अमेरिका व ब्रिटेन मांगते हैं, तो उसका जवाब न होगा। साथ में गंभीर परिणाम भी भुगतने होंगे।

हमलावरों से मुठभेड़, अफगान सैनिक मारा गया
जर्मन सेना का कहना है कि काबुल एयरपोर्ट के नॉर्थ गेट पर सोमवार सुबह अफगान सुरक्षा बलों और अज्ञात हमलावरों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। इस घटना में अफगान सेना का एक जवान मारा गया। जबकि तीन अन्य घायल हो गए। बाद में अमेरिकी और जर्मन सेना भी इसमें शामिल हो गई। देर शाम तक हमलावर की पहचान नहीं हो सकी।

काबुल एयरपोर्ट पर हमला कर सकते हैं आईएसआईएस के आतंकी
काबुल एयरपोर्ट पर भीड़ को नियंत्रित करने में लगे अमेरिकी-नाटो सैनिकों को आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएसआईएस के आतंकी आत्मघाती हमलों से निशाना बना सकते हैं। हमले का अलर्ट मिलने के बाद एयरपोर्ट इलाके में सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। अधिकारी भी भीड़ पर कड़ी नजर रख रहे हैं। हथियारों को डिटेक्ट करने के लिए जगह-जगह खुफिया सेंसर लगा दिए गए हैं। साथ ही अमेरिकी सेना एयरपोर्ट के लिए ‘वैकल्पिक मार्ग’ बना रही है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने आतंकी खतरे पर चर्चा की।

संबंध: अल कायदा की वफादारी में पड़ी आईएसआईएस की नींव
इराक में 2003 से 2011 तक चले गृहयुद्ध में आतंकी ग्रुप ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया’ ने जड़ें जमाईं। इसकी शुरुआत 1999 में अबू मुसाब अल जरकावी ने जमात अल तवाहिद वल जेहाद (जेटीजे) नाम के आतंकी गिरोह से की थी। 2004 में जरकावी ने अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के प्रति वफादारी जाहिर की। तब जेटीजे का नाम जेटीजे अलकायदा इन इराक हो गया। जनवरी 2006 में ‘अलकायदा इन इराक’ ने मुजाहिदीन शूरा काउंसिल बनाई। फिर जरकावी की मौत हो गई।

अबू बकर ने आईएस के नाम में लेवांत जोड़ा
अबू अब्दुल्ला अल-राशिद अल-बगदादी के सरगना बनने के बाद अक्तूबर 2006 को अलकायदा इन इराक का नाम इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक हो गया। अप्रैल 2010 में बगदादी मारा गया। फिर अबू बकर अल-बगदादी सरगना बना। उसने नाम इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवांत (आईएसआईएल) कर दिया।

2015 में खुरासान खड़ा किया
बकर ने 2014 में खुद को खलीफा घोषित कर दिया। 2015 में उसने अफगानिस्तान में अपना आईएस खुरासान गुट भी खड़ा किया। इसके खिलाफ अलकायदा ने लड़ाई लड़ी। बाद में दोनों तालिबान के लिए लड़ने लगे।

अफगान छात्रा का दर्द- दुनियावालो, क्या तुम्हें परवाह है, जो यहां हो रहा है ?
व्हीलचेयर बास्केटबॉल की कप्तान बोलीं- महिलाओं का बुरा दौर शुरू हो गया हैअफगानिस्तान में व्हीलचेयर बास्केटबाल की कप्तान निलोफर बयात का दर्द छलका।

उन्होंने कहा- ‘हमारा सबकुछ छिन गया है। बास्केटबॉल खेलते हुए मेरे कई वीडियो सोशल मीडिया पर हैं। उन्हें तालिबान ने देख लिया है और अब वो मुझे मार डालेंगे।’ बयात पति रमेश के साथ स्पेन पहुंची हैं। उनके साथ करीब 250 लोग निकाले गए हैं। वे कहती हैं कि अफगानिस्तान में अब महिलाओं का बुरा दौर आ गया है।

काबुल से लौटे सूरज बोले- हर पल लगता था कि कहीं से गोली आकर न लग जाए
अफगानिस्तान से लौटने वालों में उत्तर प्रदेश के चंदौली निवासी सूरज कुमार चौहान भी शामिल हैं। पेशे से वेल्डर सूरज ने बताया, ‘मैं इसी साल स्टील कंपनी में काम करने काबुल गया था। तालिबान का कब्जा होते ही कंपनी का मालिक फरार हो गया। कई लोग कंपनी में फंस गए। हर पल लगता था कि कंपनी में कब कहां से गोली आकर लग जाएगी। कंपनी से सड़क पर निकले तो जान हथेली पर थी।

छात्रा ने कहा- मैं सिर्फ अंधेरा देख पा रही हूं, न कि अपना उजला भविष्य
अफगानिस्तान की एक छात्रा ने अपना दर्द बयां किया। उसने कहा- ‘डर ने मेरे पूरे अस्तित्व पर कब्जा कर लिया है। मुझमें उम्मीद की जगह निराशा और कुंठा घर कर गई है। मैं सिर्फ अंधेरा देख रही हूं, न कि एक उजला भविष्य। मैं मारी जाउंगी। मेरे पास उसके भी कारण हैं। पर दुनियावालों, क्या तुम्हें परवाह है कि यहां क्या हो रहा है? क्या हम तुम्हारे लिए कुछ मायने रखते हैं? क्या तुम सब हमें देख रहे हो?

भास्कर इंटरव्यू

अफगानिस्तान में अब और हिंसा फैलाएगा पाकिस्तान- स्टुअर्ट मैकार्थीपूर्व मेजर, ऑस्ट्रेलिया(मेलबर्न से भास्कर के लिए अमित चौधरी)

ऑस्ट्रेलिया ने सेना की मदद करने वाले अफगानियों को मानवीय आधार पर वीसा देने से मना कर दिया है। उसका कहना है कि वह उन अफगानियों को निकलेगी, जो ऑस्ट्रेलिया एंबेसी या सेना के साथ काम कर रहे थे। पर ऐसे सैकड़ों नागरिक हैं, जिन्हें कॉन्ट्रैक्ट या ठेके पर रखे जाने के चलते वीसा नहीं दिया जा रहा। इसे लेकर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व मेजर स्टुअर्ट मैकार्थी अपनी सरकार से खफा हैं। उन्होंने विरोध में अपने मेडल जला दिए।

पढ़िए संपादित अंश…

सरकार से आपकी क्या नाराजगी है?
250 से ज्यादा अफगानी हैं, जिनकी मदद से हम तालिबान से लड़ पाए। आज उन्हें और उनके परिवार को मिलाकर करीब 1000 लोग हैं। जब उनकी बारी आई तो हमने उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया। इसलिए यह मेडल सीने पर लगाना शर्मसार करने से कम नहीं। मैंने कह दिया है कि सरकार जब तक अफगानियों को ऑस्ट्रेलिया नहीं लाती, तब तक मेडल नहीं पहनूंगा। विरोध जताने के लिए मैंने पीएम को मेडल लाैटाए हैं।

अफगान फौज मजबूत क्यों नहीं हुई?
ऐसा नहीं है। हमारी सेना ने अफगान सेना की फोर्थ ब्रिगेड ट्रेनिंग दी थी। 2013 में हम उस इलाके से हट गए थे। बीते 8 साल से यही ब्रिगेड तालिबान को इस इलाके से दूर रखे हुए थी। अचानक विदेशी फौजों के जाने से अफगान सेना पस्त हो गई।

इसका एशिया पर असर पड़ेगा?
पाकिस्तान तालिबान को दूसरे देशों के खिलाफ उपयोग करेगा। खासतौर पर भारत के खिलाफ। दुनिया भर के देशों को पाक पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। पाक फौज और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत समेत पूरे दक्षिणी एशिया में इस्लामिक आतंकवाद को और बढ़ावा देगा।

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