जीएसटी काउंसिल की बैठक कल: कोरोना की दवाओं, टीकों के टैक्स पर होगी चर्चा, राज्यों के कलेक्शन में कमी पर भी उठेगी बात

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  • Discussion Will Be Held On The Taxes Of Corona’s Medicines, Vaccines, The Matter Will Also Arise On The Decrease In The Collection Of States.

मुंबई7 घंटे पहले

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वित्तमंत्री ने कहा है कि इस तरह की छूट से ग्राहकों के लिए जीवनरक्षक वस्तुएं महंगी हो जाएंगी क्योंकि निर्माता इनपुट पर पेमेंट किए गए टैक्स की भरपाई नहीं कर पाएंगे।

  • जीएसटी काउंसिल की बैठक करीबन 8 महीने बाद हो रही है

जीएसटी काउंसिल शुक्रवार को कोविड दवाओं, टीकों और मेडिकल उपकरणों पर टैक्स की दर में कमी के साथ-साथ राज्यों को हुए पैसे में कमी की भरपाई के साधनों पर चर्चा कर सकती है।

विरोधी राज्यों ने बनाई है रणनीति

सूत्रों ने कहा कि टॉप लेवल पर निर्णय लेने वाली संस्था की बैठक से पहले गैर-भाजपा और समान विचारधारा वाले दलों-राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, झारखंड, केरल और पश्चिम बंगाल द्वारा शासित 8 राज्यों के वित्त मंत्रियों ने कोविड इसेंशियल पर जीरो टैक्स रेट के लिए दबाव बनाने के लिए एक मिलीजुली रणनीति तैयार की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होने वाली इस काउंसिल की करीब आठ महीने में पहली बार बैठक हो रही है।

राज्यों के बकाए पैसे पर भी होगी चर्चा

टैक्स रेट पर चर्चा के अलावा, काउंसिल अनुमानित 2.69 लाख करोड़ रुपए पर भी विचार कर सकती है। यह रकम राज्यों को 2017 में वादे के अनुसार दिए जाने वाले भरपाई वाली है। ऐसा इसलिए क्योंकि वैट और अन्य टैक्स लगाने का अधिकार छोड़ देने के कारण उन्हें रेवेन्यू में नुकसान हुआ था। हालांकि अंतिम उत्पादों को जीएसटी से छूट देने से निर्माताओं को कच्चे माल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ प्राप्त करने का विकल्प नहीं मिलेगा और इसलिए ग्राहकों को ज्यादा लाभ नहीं होगा ।

सैनिटरी पर घटा था जीएसटी का रेट

2018 में काउंसिल ने विभिन्न महिला संगठनों की मांगों के बाद सैनिटरी नैपकिन पर जीएसटी को पहले की दर से 12 पर्सेंट की छूट दी थी। इस हफ्ते की शुरुआत में पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने सीतारमण को लिखे पत्र में कहा था कि कोविड महामारी से लड़ने के लिए जरूरी वस्त्र, डिजिटल थर्मामीटर, लेबोरेटरी सेनिटाइजर/कीटाणुनाशक और पेपर बेड शीट सहित कई सामानों पर 20 पर्सेंट तक का बेसिक कस्टम ड्यूटी और 18 पर्सेंट तक का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लगाया जा रहा है।

उसके ऊपर ऐसी वस्तुओं पर 10 पर्सेंट सोशल वेलफेयर सरचार्ज लगाया जाता है। बादल ने पत्र में कहा कि यह चौंकाने वाला है कि संकट के बावजूद हमारा देश वर्तमान में अति आवश्यक चीजों पर इतनी बड़ी दरों पर टैक्स लगा रहा है। इससे इस महामारी से लड़ने में समस्या आ रही है।

वित्तमंत्री ने पहले ही टैक्स घटाने की संभावना खत्म कर दी है

इस महीने की शुरुआत में सीतारमण ने कोविड टीकों, दवाओं और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स को जीएसटी से छूट देने से लगभग इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि इस तरह की छूट से ग्राहकों के लिए जीवनरक्षक वस्तुएं महंगी हो जाएंगी क्योंकि निर्माता इनपुट पर पेमेंट किए गए टैक्स की भरपाई नहीं कर पाएंगे। वर्तमान में, टीकों की घरेलू आपूर्ति और आयात पर 5 पर्सेंट जीएसटी लगता है जबकि कोविड दवाओं और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पर 12 पर्सेंट का टैक्स लगता है।

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