मार्च 2022 के मध्य तक आ सकता है एलआईसी का 90,000 करोड़ रुपये का मेगा आईपीओ

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LIC IPO: देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) के मेगा आईपीओ (IPO) मार्च 2022 महीने के मध्य में आ सकता है. माना जा रहा है एलआईसी 90,000 करोड़ रुपये का आईपीओ लेकर आ सकती है. जनवरी के आखिरी में  एलआईसी ( LIC ) अपने मेगा आईपीओ के लिए शेय़र बाजार ( Stock Market ) के रेग्युलेटर सेबी ( Securities and Exchange Board Of India) के पास जड्रॉफ्ट पेपर्स ( Draft Red Herring Prospectus)दाखिल कर सकती है. 

फिलहाल सरकार एलआईसी का वैल्युएशन का पता लगाने में जुटी है. अगले महीने फरवरी से एलआईसी के आईपीओ के रोडशो की शुरुआत होगी. पिछले शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्रालय के अधिकारियों और एलआईसी के अधिकारी के साथ वीडियो कॉंफ्रेंसिंग के जरिए बहुप्रतिक्षित एलआईसी के आईपीओ की समीक्षा की थी. 

Union Finance Minister Smt. @nsitharaman reviewed progress of the LIC IPO in New Delhi today in presence of @SecyDIPAM; Secretary @DFS_India and Senior Officials @LICIndiaForever and @FinMinIndia via VC. pic.twitter.com/UvQjKkuv3a

— Ministry of Finance (@FinMinIndia) January 7, 2022

दरअसल शेयर बाजार के निवेशकों को एलआईसी (LIC) के मेगा आईपीओ (IPO) का इंतजार है. लेकिन एलआईसी के आईपीओ की राह इतनी आसान नहीं नजर आ रही है. एलआईसी के आईपीओ की राह में अभी कई अड़चनें और पेच फंसी है. ये पेंच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति से जुड़ा है. यही वजह है कि एलआईसी के आईपीओ की राह आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार एफडीआई नीति (FDI Policy) में संशोधन करने पर विचार कर रही है जिससे एलआईसी में विदेशी निवेश की इजाजत दी जा सके और दुनिया के बड़े ग्लोबल फंड्स (Global Funds) आईपीओ में हिस्सा ले सकें. 

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव अनुराग जैन के मुताबिक मौजूदा एफडीआई नीति एलआईसी की विनिवेश प्रक्रिया को आसान नहीं करेगी इसलिए इसमें संशोधन की जरुरत है. उन्होंने कहा कि सरकार एफडीआई नीति को आसान बनाने पर काम कर रही है. इसके लिए जल्द निति में बदलाव करना होगा जिससे एलआईसी का विनिवेश किया जा सके. सरकार संशोधित एफडीआई नीति ला रही है.

कहां फंसा है पेंच
अनुराग जैन के मुताबिक अभी दो दौर की चर्चा हो चुकी है और डीपीआईआईटी, डीएफएस (वित्तीय सेवा विभाग) तथा दीपम में इसको लेकर सहमति है.  हम एफडीआई नीति में जरुरी बदलावों का मसौदा तैयार किया जा रहा है इसे मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा. जिस पर कैबिनेट फैसला लेगी. 

एफडीआई की मौजूदा नीति के अनुसार बीमा क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट के तहत 74 फीसदी विदेशी निवेश की इजाजत है. लेकिन ये नियम एलआईसी पर लागू नहीं होती क्योंकि उसकी व्यवस्था संसद द्वारा बनाए गए एलआईसी अधिनियम से चलती है. एलआईसी में एफडीआई की मंजूरी से ग्लोबल फंड्स इसके आईपीओ में हिस्सा ले सकेंगे और साथ ही लिस्टिंग के बाद उनके लिए अहम हिस्सेदारी खरीदने का रास्ता भी खुल जाएगा. 

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