दिलीप कुमार निधन: जब मुमताज से सायरा बानो ने कहा था- ‘यूसुफ साहब जब मर जाएंगे तो मैं…’

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बॉलीवुड अभिनेता दिलीप कुमार (Dilip Kumar) ने बुधवार को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। दिलीप के निधन पर फैन्स के साथ ही साथ सितारों ने भी दिवंगत अभिनेता को याद किया। ऐसे में दिग्गज अभिनेत्री मुमताज (Mumtaz) ने उन्हें याद किया और साथ ही साथ सायरा बानो (Saira Banu) का भी जिक्र किया है।

मैं बहुत खुश थी…
‘राम और श्याम’ में दिलीप कुमार के साथ अभिनय करने वालीं अदाकारा मुमताज ने बॉम्बे टाइम्स से बातचीत में कहा, ‘वे महमूद थे, जिन्होंने मेरा नाम फिल्म के लिए सुझाया था। उस वक्त मैं नई थी और दिलीप साहब ने महमूद के कहने पर मेरे कुछ रील्स देखे थे, जिसके बाद वो मेरे साथ काम करने के लिए तैयार हो गए थे। मैं बहुत खुश थी कि वे मेरे साथ काम करने के लिए तैयार हो गए थे।’

मैं उन्हें छूने में कांप रही थी…
मुमताज ने आगे कहा, ‘एक सीन था, जहां वे (दिलीप साहब) तल्लीनता के साथ कुछ पढ़ रहे होते हैं और मुझे उनकी पीठ पर हाथ मारते हुए कहना था- बदतमीज, तू इधर आके बैठा है और वहां तेरी मां सारी दुनिया में तुझे ढूंढ रही हैं। मैं उन्हें छूने में कांप रही थी। हमने सीन की दो-तीन बार रिहर्सल की और दिलीप साहब ने मुझे एक दम नेचुरल रहने के लिए कहा।’

मार, तो ऐसे मार कि मैं हिल जाऊं….
मुमताज आगे कहती हैं, ‘इसके बाद दिलीप साहब ने कहा- अरे भाई ये फिल्म है… मार, तो ऐसे मार कि मैं हिल जाऊं.. तू जरा जोर से मार, एक दम अड़ियल लड़की की तरह। दिलीप कुमार ने मुझे बहुत सहज महसूस करवाया, तब प्लान के मुताबिक सीन शूट हो पाया।’

देखो आपकी एक्ट्रेस आई हैं…
सायरा बानो के साथ मुंबई में हुई उनकी मुलाकात को याद करते हुए सायरा ने कहा, ‘सायरा जी ने गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया था। जब मैं उनसी मिली थी, उन्होंने चाय के साथ ढेर सारा खाना भी रख दिया था। जब दिलीप साहब कमरे में आए तो उन्होंने राम और श्याम फिल्म प्ले कर दी थी और कहा कि देखो आपकी एक्ट्रेस आई हैं, आपसे मिलने।’

वो एक ताजमहल है…
बातचीत में सायरा ने आगे कहा, ‘दिलीप कुमार जैसा आदमी जो है न, वो एक ताजमहल है, और मैं ये चाहूंगा कि वो ताज महर की तरह कभी गुजरें ही नहीं… बस जिंदा रहें हमेशा। ताकि लोग हमेशा उन्हें देखें और उनकी इज्जत करते रहें।’ सायरा को मुमताज ने एक आदर्श पत्नी बताते हुए कहा- जब मैं और मेरी बहन उनसे मिले थे, तो उन्होंने मुझसे कहा था- यूसुफ साहब जब मर जाएंगे तो मैं भी मर जाऊंगी… क्या करूंगीं मैं उनके बाद…?’



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