BIRTHDAY SPECIAL: इस ‘चूहे’ और ‘बिल्‍ली’ की सल्‍तनत 80 साल से कायम है

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नीमेशन की दुनिया भी अजब-गजब है. यहां के ‘किंग’ और ‘शहंशाह’ आदमी नहीं जानवर हैं. ये यहां के इतने बड़े स्‍टार हैं कि इनकी बराबरी सलमान-शाहरूख या अमिताभ भी नहीं कर सकते. ‘टॉम एण्‍ड जेरी’ इस फील्‍ड के ‘सुप्रीम’ स्‍टार हैं.  इन्हें एनीमेशन की दुनिया में सदी के नायक का दर्जा भी दिया जाए तो गलत नहीं होगा. आखिर पिछले 80 साल से ज्‍यादा समय से ये दर्शकों के दिलो दिमाग पर राज जो कर रहे हैं. इनके र‍चयिता हैं विलियम हन्‍ना और जोसेफ बारबरा. जो ‘हन्‍ना–बारबरा’ के नाम से जाने जाते हैं. 14 जुलाई विलियम का जन्‍म दिन है. सो, हम हन्‍ना को तो याद करेंगे ही उससे ज्‍यादा बातें करेंगे उनके बनाए अजर-अमर केरेक्‍टर्स ‘टॉम एण्‍ड जेरी’ की.

बचपन में स्‍कूल की हिंदी किताबों में चूहों और बिल्‍ली की एक कहानी पढ़ाई जाती थी. एक घर में बहुत सारे चूहे सुख-चैन से रहते थे, खूब खाते-पीते, खूब मस्‍ती करते. एक दिन उस मकान मालिक एक बिल्‍ली को घर ले आया. घर में बिल्‍ली क्‍या आई, चूहों की तो शामत ही आ गई. आराम से जिंदगी बिता रहे चूहों का चैन-सुकून सब बिल्‍ली ने छीन लिया. बिल्‍ली मस्‍ती से घर में रहती, ढेर सारा दूध पीती और रोज़ एक दो चूहे पकड़कर खा जाती. परेशान चूहों ने सभा बुलाई. चूहों के सरदार ने हालात बताए और सुझाव मांगे कि इस बिल्‍ली से कैसे छुटकारा पाया जाए. किसी को कुछ सूझ ही नहीं रहा था. तभी एक नौजवान चूहा खड़ा हुआ और बोला ‘एक काम करते हैं, बिल्‍ली के गले में घंटी बांध देते हैं.

घंटी की आवाज़ से हम सतर्क हो जाएंगे और भाग जाएंगे.’  सुझाव सुनकर पूरा हाल तालियों से गूंज उठा और हर तरफ से आवाज आने लगी. ’ वाह-वाह वा, क्‍या शानदार सुझाव दिया है,’ सुझाव सुनने के बाद चूहों को लगा अब इस बला से छुटकारा मिल जाएगा. तभी एक बुज़ुर्ग चूहा बोला ‘सुझाव तो अच्‍छा है, कारगर भी, लेकिन एक बात बताईए, बिल्‍ली के गले में घंटी कौन बांधेगा. सभा को सांप सूंघ गया. सन्‍नाटा पसर गया, तमाम खुशियों पर पल भर में पानी फिर गया. ना तो किसी के पास इस सवाल का जवाब था, ना घंटी बांधने साहस. सब खामोश थे. तभी बिल्‍ली के आने की आवाज़ सुनाई दी और सभी चूहे अपने-अपने बिलों में जाकर छिप गए.

चूहों से व्‍यथित थे हन्‍ना और जोसेफचूहों की इस व्‍यथा से विलियम हन्‍ना और जोसेफ बारबरा इतने व्‍यथित हुए कि उन्‍होंने चूहों के समर्थन में एक एनीमेशन की एक लघु फिल्‍म श्रंखला ही रच डाली , जो टॉम एण्‍ड जेरी के रूप में दर्शकों के सामने आई. आई भी तो ऐसी आई के जाने का नाम ही नहीं ले रही ना दिल से ना दिमाग से. इसके पुराने एपीसोड आज भी धूम मचाए हुए हैं. टॉम एण्‍ड जेरी की तमाम खूबियों पर हम आगे बात करेंगे लेकिन एक खासियत यहां बताते चलें कि एक ही शार्ट को एक से अधिक बार देखने पर भी उसका मज़ा कम नहीं होता. इसीलिए तो टॉम एण्‍ड जेरी के प्रोडक्‍शन बीच में भले ही बनना बंद हो गए हों, इसकी व्‍यूवरशिप बरकरार रही, कम ज्‍यादा भले ही होती रही हो.

एक‍ दिलचस्‍प सवाल टॉम एण्‍ड जेरी को लेकर ये पूछा जाता है कि इन दौनों में से कौन ज्‍यादा जालिम है. ज्‍यादातर का जवाब होता है टॉम. लेकिन क्‍या सचमुच ? ध्‍यान से देखें तो पता चलेगा कि टॉम तो बेचारा अपने काम से काम रखता है लेकिन जेरी उसे बार-बार छेड़ता है, उकसाता है और परेशान करता है तभी टॅाम उसपर गुस्‍सा होता है. बदमाशी की ज्‍यादातर शुरूआत शैतान जेरी ही करता है. लाख टके का सवाल ये है कि ऐसा क्‍यों ?  शैतान चूहे के प्रति लोगों की इतनी सुहानूभुति क्‍यों ?

दरअसल इसके पीछे ह्यूमन सॉयक्‍लॉजी है. मानवीय स्‍वभाव ऐसा है कि वो हमेशा कमजोर के पक्ष में खड़ा होता है और ताकतवर के विरोध में. फिर चाहे वो फिल्‍म हो या असल जिंदगी. अब चूंकि बिल्‍ली ताकतवार है और चूहा कमजोर तो लोग हमेशा चूहे के पक्ष में रहते हैं. इसीलिए जेरी दर्शकों का चहेता है. लेकिन दूसरी तरफ टॅाम के फेन्‍स भी कम नहीं है. यह विरोधाभास है, जिसे सहज-सरल और ग्राह्य बनाया है विलियम हन्‍ना और जोसेफ बारबरा की लेखक-निर्देशक जोड़ी ने. तभी तो बेहद तेज़ रफ्तार, दिलचस्‍प, रोचक और रोमांचक शार्ट फिल्‍मों की श्रंखला का यह शो इतने बरसों से दर्शकों के दिल पर अनवरत राज कर रहा है. दिलचस्‍प ये भी है कि कार्टून शो आमतौर बच्‍चों को पसंद आते हैं लेकिन टॅाम एण्‍ड जेरी के प्रशंसकों में बच्‍चे, बूढ़़े, जवान,  सभी शामिल हैं. ये सचमुच कमाल है.जेरी और टॅाम के बीच ज़द्दोज़हद की कहानी
समीक्षक के नज़रिए से देखें तो क्‍या है इसका प्‍लॉट. कुछ भी तो नहीं ?  एक चूहा, बिल्‍ली को परेशान करता है वो उसे पकड़ने दौड़ती है. वो कभी पकड़ में आता है, कभी नहीं. पकड़ में आता भी है तो छूट जाता है. हां कभी-कभी इनकी दोस्‍ती भी दिखाई देती है, खासकर तब जब इन पर बाहरी मुसीबत आती है. एक ही लोकेशन पर लगभग एक सी कहानी. नया क्‍या है ?  इस नज़र से देखें तो नए के नाम पर सिर्फ घटनाएं ही नई मिलेंगी.

लेकिन, जेरी की मा‍सूमियत भरी शैतानियां और टॅाम से बचकर भागने की ज़द्दोज़हद में दर्शक शो में इतना डूब जाता है कि उसे पता ही नहीं चलता कि कब समय निकल गया. यहां फिर हन्‍ना–बारबरा की कल्‍पनाशीलता और उनकी क्रिएटिविटी की तारीफ करना पड़ेगी. जिन्‍होंने चूहे-बिल्‍ली के इस साधारण खेल को दुनिया का सबसे बड़ा शो बनाकर पेश कर दिया. ऐसा शो जिसके मोहपाश से कोई छूट नहीं पाता, छूटना चाहता भी नहीं.

शो में कुछ हेल्पिंग केरेक्‍टर भी हैं. जिनमें टॉम की प्रेमिका, बुलडॉग और मालकिन ‘मेमी टू शूज़’ शामिल है. मेमी के कलर को लेकर जातिवादी भेदभाव के आरोप ने इस सीरीज़ को कंट्रोवर्सी में भी फंसाया. बाद में इसका चेहरा नहीं दिखाया गया. फेस के नीचे का हिस्‍सा और दो शूज़ दिखाए जाते थे. फेस एक एपीसोड में दिखाया गया था. इस विषय से जुड़ी एकाधिक फुल लेंथ मूवी भी बनी हैं. पसंद भी की गई हैं, लेकिन शो जितनी नहीं. यह फिल्‍म 1992 में आई थी. यह शो की तरह सायलेंट नहीं थी. इसमें दौनों दोस्‍त थे और नाच गाना भी करते थे. मूवी पसंद जरूर की गई पर बॉक्‍स ऑफिस पर पैसे बरसाने वाली साबित नहीं हो पाई.

टॉम एण्‍ड जेरी पर एक लाइव एक्‍शन मूवी फरवरी 2021 में रिलीज हुई है. जिसने अच्‍छा बिजनेस भी किया है.  फिल्‍म्‍ के निर्देशक टिम स्‍टोरी और ले‍खक केविन कोस्‍टेलो हैं.इसे वार्नर ब्रदर्स पिक्‍चर्स ने रिलीज़ किया था.

ऐसे शुरू हुई ये सीरीज़
बात 1940 की है. विलियम हन्‍ना और जोसेफ बारबरा एनीमेशन कंपनी एमजीएम (मेट्रो गोल्‍डविन मेयर) में काम करते थे. उन्‍हें एक एनीमेशन शार्ट फिल्‍म बनाने को कहा गया. परिणामस्‍वरूप Puss Gets the The Boots सामने आई. फिल्‍म ने खासी प्रशंसा बटोरी लेकिन कंपनी ने इस सीरीज़ को आगे नहीं बढ़ाने का मन बनाया क्‍योंकि उन्‍हें नहीं लगता था कि चूहे-बिल्‍ली के ये केरेक्‍टर आगे भी पसंद किए जाएंगे. लेकिन इसे जब अकादेमी अवार्ड (आस्‍कर) के लिए नामिनेशन मिला तो समझ में आया कि कुछ तो कमाल हुआ है.

1941 में प्रोड्यूसर Fred Quimby के साथ मिलकर हन्‍ना-बारबरा ने एक शार्ट फिल्‍म का निर्माण किया. इस सीरीज़ का नाम ‘टॉम एण्‍ड जेरी’ रखा गया. पहली शार्ट का उपशीर्षक था ‘द मिड नाइट स्‍नेक’.  तय किया गया कि चूहे-बिल्‍ली को नया नाम का दिया जाए. जिसके लिए कंपनी में बाकायदा कांटेस्‍ट हुआ और नाम सुझाने वाले को 50 डॉलर का इनाम भी दिया गया. इस तरह टॉम एण्‍ड जेरी नाम अस्तित्‍व में आया. ये अलग बात है कि ये नाम इससे पहले एक फिल्‍म में यूज़ किए जा चुके थे लेकिन तब ये ह्युमन केरेक्‍टर के नाम थे. पहली फिल्‍म में टॉम और जेरी के नाम Jesper and Jinx थे.

जिस दौर में यह सीरीज़ बनाई गई थी तब प्रदर्शन के लिए एकमात्र जगह थिएटर ही थे, फिर चाहे वो फुल लेंथ फिल्‍म हो या शार्ट एनीमेटेड मूवी. आस्‍कर तब भी बड़ा नाम था, आज भी है. लेकिन तब आस्‍कर मिलना तो दूर नामिनेशन होना ही बड़ी बात थी.

‘टॉम एण्‍ड जेरी’ को यूं ही तो ग्रेट आर्ट वर्क नहीं माना जाता. इसे 1940 से 1954 के बीच 14 नॉमिनेशन मिले और इसने 07 ऑस्‍कर जीते. 1941 से 1958 तक हन्‍ना-बारबरा की जोड़ी ने कुल 114 Shorts का क्रिएशन, लेखन और निर्देशन किया. 1958 में  हन्‍ना-बारबरा के एमजीएम छोड़ने के बाद 1961 से 1962 के बीच Gene Deitch   टॉम एण्‍ड जेरी के Shorts बनाए.

बाद में, 1963 से 1967 के मध्‍य Chuck Jones  ने इस सीरीज़ के लिए 34 शार्ट फिल्‍मों की रचना की. जोन्‍स ने दौनों केरेक्‍टर्स में बदलाव किए. टॉम में ज्‍यादा जेरी में एकाध. अलग-अलग प्रोडक्‍शन हाउस द्वारा बनाए गए टॅाम एण्‍ड जेरी शो में वो बात नहीं थी जो हन्‍ना-बारबरा के क्रिएशन में थी. सो लंबे गेप के बाद 1975 में हन्‍ना-बारबरा की एमजीएम कंपनी में वापसी हुई और 1977 तक उन्‍होंनं 48 शार्ट फिल्‍में बनाईं जिनकी अवधि सात मिनिट थी. बार-बार अंतराल के बावजूद टॉम जेरी इसलिए चलते रहे, पसंद किए जाते रहे क्‍योंकि इनकी रिपिटीशन वेल्‍यू थी. ये मनोरंजक तो थे ही. तनाव को कम करने का कारगर नुस्‍खा भी थे. स्‍ट्रेस दूर करने की इसकी खूबी ने ही इसे कालजयी बनाया.

जब नए अवतार में सामने आए टॉम एण्‍ड जेरी
1980 से 1982 तक Filmation Studio  ने इस पर काम किया. 1990 में टॉम एण्‍ड जेरी नए अवतार में सामने आए और दर्शकों ने इनका बचपन देखा. ‘टॉम एण्‍ड जेरी- किड्स’ का यह सिलसिला 1994 तक चला. बाद में, यह कंपनी वार्नर ब्रदर्स की मिल्कियत में आ गई और उन्‍होंने ‘टॉम एण्‍ड जेरी-टेल्‍स’ के नाम से सीरीज बनाईं. बीच में हन्‍ना-बारबरा ने अपना टीवी प्रोडक्‍शन स्‍टूडियो भी बनाया और स्‍कूबी डू और योगी बियर कार्टून बनाए.

विलियम हन्‍ना का जन्‍म 14 जुलाई 1910 को न्‍यू मेक्सिको टेरिटरी में हुआ था. उनके पिता विलियम जान की नौकरी के कारण इनका परिवार अलग-अलग स्‍थानों पर रहा करता था. वे सात भाई बहनों में तीसरे नंबर पर थे. कॉलेज छोड़ने के बाद हन्‍ना ने इंजीनियर के रूप में काम किया, कार वाश कंपनी में भी जॉब किया. उनकी बहन के प्रेमी की सलाह पर उन्‍होंने हरमन एण्‍ड इसिंग स्‍टूडियो ज्‍वाइन किया. जिसने लूनी ट्यून्‍स और मेरी मेलीडीज़ श्रंखला बनाई थी. यहां उनकी ड्राइंग प्रतिभा सामने आई. 1933 में जब हरमन-इसिंग ने एमजीएम की स्‍थापना की तब हन्‍ना उनके साथ थे. 1936 में हन्‍ना को पहला कार्टून को निर्देशित करने का मौका मिला. बाद में उन्‍होंने जोसेफ बारबरा के साथ जोड़ी बनाई और 1940 में पुस गेट्स द बूट का निर्देशन किया. इस जोड़ी में जोसेफ बारबरा कहानी और प्री प्रोडक्‍शन का काम देखते थे जबकि विलियम हन्‍ना डायरेक्शन और एनीमेशन पर्यवेक्षण की जिम्‍मेदारी निभाते थे.

दुनिया में सबसे मुश्किल काम लोगों को हंसाना होता है. टॉम और जेरी की ये जोड़ी इसी मुश्किल काम को लंबे समय से अंजाम देती आ रही है, उम्‍मीद है आगे भी देती रहेगी. लिखते-लिखते दिमाग़ थक सा गया है, चलो थोड़ा-सा फ्रेश होते हैं, ‘टॉम एण्‍ड जेरी’ देखते हैं. आपका क्‍या ख्‍याल है ?

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)





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