13 Mussoorie Review: 13 मसूरी, मर्डर मिस्ट्री के नाम पर उलझा हुआ मांझा

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मुंबईः हमारे देश में विदेशी स्क्रिप्ट्स से प्रभावित ड्रामा बहुत कम पसंद किये जाते हैं. विदेशी स्क्रिप्ट, खासकर मर्डर मिस्ट्री, में एक ऐसा पात्र ज़रूर होता है जो किसी दिमागी असंतुलन का शिकार होता है, उसकी एक बैकस्टोरी होती है, जिसका खुलासा आखिरी एपिसोड में होता है. वूट (Voot) पर हाल ही में रिलीज़ 13 एपिसोड की वेब सीरीज “13 मसूरी (13 Mussoorie)” एक मर्डर मिस्ट्री है जिसके ट्रेलर से काफी संभावनाओं ने जन्म लिया था मगर खींच-खींच के कहानी का रबर बना दिया और कहानी में तनाव की बजाये बोरडम घुसा दिया. मसूरी की खूबसूरत लोकेशन, पहाड़, घुमावदार रास्ते, धुंध, हरियाली और शांत लोकेशन का फायदा उठाने के लिए लेखक कर्मण्य आहूजा इस सीरीज की रचना की थी. प्राप्त जानकारी के हिसाब से ये सीरीज 2018 में बन कर तैयार थी और फिर एक लम्बे अंतराल के बाद इसे वूट पर रिलीज़ किया गया. हालाँकि का साल कहानी पर इस का कोई असर नहीं पड़ता लेकिन पटकथा की रफ़्तार पर इसका असर ज़रूर पड़ता है. ढाई सालों का अंतराल, इस वेब सीरीज की रफ़्तार पर विपरीत असर डालता है. कहानी धीमी लगती है. मसूरी में एक सीरियल किलर प्रकट होता है जो अक्स नाम के एक पुराने सीरियल किलर की तर्ज़ पर मर्डर कर रहा है. शहर में थोड़ी दहशत फैलती है. ऋषि पंत (विराफ पटेल) नाम के एक पुलिस अफसर को इस केस की जांच की ज़िम्मेदारी दी जाती है. ऋषि की पत्नी अदिति बिष्ट (श्रिया पिलगांवकर) एक पत्रकार है और अनजान नम्बरों से आने वाले फ़ोन कॉल्स की वजह से वो भी इस केस की और खींच ली जाती है. इसकी तह में जाने की वजह से अदिति को अपने स्वर्गवासी पिता और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अजय बिष्ट के बारे में कुछ खूफ़िया जानकारी मिलती है. अजय, अक्स नाम के सीरियल किलर की जांच कर रहे होते हैं. जांच पूरी नहीं होती मगर अक्स उस वक़्त तो गायब हो जाता है, और चार साल बाद, अजय बिष्ट की मृत्यु के बाद वापस मसूरी लौट आता है. कौन है ये अक्स, क्यों मर्डर कर रहा है, इसका अदिति से क्या सम्बन्ध है…. ऐसे कई सवालों का जवाब है 13 मसूरी. कहानी से तो लगता है कि मर्डर मिस्ट्री देखने वालों को बहुत पसंद आएगी मगर इसका स्क्रीनप्ले यानि पटकथा इतनी लचर है कि देखने वाले को न तो मर्डर देखने का न ही मिस्ट्री सॉल्व करने का मन करता है. मर्डर मिस्ट्री में महत्वपूर्ण होता है कि मर्डर करने वाले ने वो मर्डर कैसे प्लान किया, फिर कैसे उसने मर्डर किया. ये देखने वालों के लिए महत्वपूर्ण होता है. या फिर उस मर्डर के होने के घटनाक्रम को एक मिस्ट्री की शक्ल दी जाये, कोई क्लू दिया जाए, कोई सुराग छोड़ा जाए. 13 मसूरी में ये बिलकुल नहीं होता. एक मर्डर के समय वहां जर्मन शेफर्ड कुत्ता भी होता है जिसकी सूंघने की क्षमता तेज़ होती है और जासूसी कुत्ते की तरह उसका इस्तेमाल होता है. वेब सीरीज में उस कुत्ते की कोई अहमियत ही नहीं है और वो किसी प्रकार की कोई मदद नहीं करता, यहाँ तक कि जब हत्यारा खून कर रहा होता है तब भी वह मालिक का बचाव नहीं करता. जब अक्स का कॉपी कैट किलर खून करता है तो उसका मोटिवेशन तो आखिर में समझ आ जाता है. हालाँकि वो मोटिवेशन भी बहुत कमज़ोर और लचर होता है.

श्रिया पिलगांवकर ने भरसक प्रयास किया है कि वो अच्छा अभिनय कर सकें मगर उनके चेहरे पर भाव बहुत देर तक टिके नहीं रहते. मर्डर मिस्ट्री के लिए अभिनेता के चेहरे पर रहस्य और प्रताड़ना के भाव स्थायी होते हैं, श्रिया के चेहरे पर ये नहीं आते. इनके साथी कलाकार विराफ पटेल की पर्सनालिटी प्रभावी है, आवाज़ भी अच्छी है मगर अभिनय उतना परिपक्व नहीं हैं. बाकी कलाकारों को डिफाइन करने की कोशिश ही नहीं की गयी है. कई कलाकार आते हैं जिनका केस या श्रिया से क्या कनेक्शन है वो समझ ही नहीं आता और उनमें से कुछ लोगों का मर्डर क्यों हो रहा है वो समझना नामुमकिन है. कहानी का विस्तार ज़रुरत से ज़्यादा ही है. 13 एपिसोड्स तक खींचने के चक्कर में मर्डर होते रहते हैं, हर एपिसोड में एक नया किरदार कहानी भटकाने की कोशिश करता है. एक दो सब-प्लॉट तो इतने व्यर्थ हैं कि कहानी के लिए कुछ नहीं करते. इसे 8 एपिसोड में समेटा जाना चाहिए था.
निर्देशक हैं अभिजीत दास. संजीवनी नाम का एक मेडिकल प्रोफेशन पर आधिरत सीरियल डायरेक्ट कर चुके हैं, अनुभवी हैं और इस वेब सीरीज में भी काम अच्छा ही किया है मगर पटकथा और कथा ने धोखा दे दिया. एक निर्देशक के नाते उन्होंने कहानी को बेहतर करने की कोशिश की होगी मगर कुछ खास फर्क पड़ा नहीं है. 13 मसूरी थोड़ा बोझिल और उबाऊ है और मर्डर मिस्ट्री जैसा थ्रिल भी इसमें नहीं है. विदेशी वेब सीरीज देख कर पटकथा का बहुत सारा हिस्सा रचा गया है और वो कहानी से बिलकुल अलग नज़र आता है. पता नहीं हिंदुस्तान में कौनसे पत्रकार या पुलिस वाले एक बोर्ड बना कर सबूतों को आपस में जोड़ते हैं और जुर्म का खाका बनाते हैं. अगर आप मर्डर मिस्ट्री देखने का शौक रखते हैं तो 13 मसूरी शायद आपको उतना मज़ा न दे.





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