देश में पहला ऐसा मामला: आंतों तक पहुंचा ब्लैक फंगस, दिल्ली में भर्ती दो मरीजों की आंत में फंगस ने किया छेद; दोनों में पेट दर्द के लक्षण से हुई संक्रमण की शुरुआत

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43 मिनट पहले

दिल्ली में आंतों तक ब्लैक फंगस पहुंचने के दो मामले सामने आए हैं। दोनों मरीजों का इलाज सर गंगाराम हॉस्पिटल में किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है, ऐसा पहली बार देखा गया है जब ब्लैक फंगस आंतों तक पहुंचा और उसमें छेद कर दिया है। पहले मरीज की उम्र 56 साल है और दूसरा मरीज 68 साल का है।

पहले से कोरोना संक्रमित मरीज में शुरू हुआ था पेट दर्द
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, 68 साल के मरीज का इलाज करीब एक हफ्ते से चल रहा है। पत्नी के साथ मरीज की भी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उसमें कोरोना के हल्के लक्षण थे। पेट में दर्द होने पर मरीज ने एसिडिटी की दवाएं ली। करीब 3 दिन तक घर पर दवाएं लेने के बाद फायदा न होने पर उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।

सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. उषास्त धीर का कहना है, कोरोना के संक्रमित होने के कारण पहले ही मरीज काफी कमजोर था और उसे यहां वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। मरीज का सीटी स्कैन किया। रिपोर्ट में छोटी आंत में छेद मिला। ब्लैक फंगस का शक होने पर तुरंत एंटी-फंगल ट्रीटमेंट दिया गया। मरीज की सर्जरी की गई और आंतों के संक्रमित हिस्से को बायोप्सी के लिए भेजा गया।

कोरोना रिकवरी के बाद दूसरे मरीज में भी पेट दर्द से हुई शुरुआत
वहीं, 56 वर्षीय दूसरा मरीज कोरोना से रिकवर हो चुका था, इसके बाद उसमें पेट दर्द के लक्षण दिखे। मरीज डायबिटीज से भी जूझ रहा था और कोरोना के इलाज के दौरान उसे स्टेरॉयड दिए गए थे। लक्षण दिखने पर तत्काल मरीज का सीटी स्कैन कराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले मरीज की तरह इस मरीज की भी छोटी आंत में छेद दिखे। बायोप्सी रिपोर्ट में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो चुकी है। मरीज के परिवार में पत्नी समेत 3 लोगों की पहले ही कोरोना से मौत हो चुकी है।

दुर्लभ हैं ऐसे मामले
हॉस्पिटल के मुताबिक, आंत में ब्लैक फंगस के ये दोनों मामले दुर्लभ है। इसे इंटेस्टाइनल म्यूकरमायकोसिस कहते हैं। इसकी शुरुआत पेट या आंत से होती है। ऐसे मामले उन मरीजों में दिखते हैं, जिनका ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ है। लेकिन अस्पताल में आए दोनों मामले काफी अलग हैं। दोनों मरीजों को कोविड हुआ और छोटी आंत में ब्लैक फंगस का संक्रमण हुआ।

क्या है ब्लैक फंगस

यह एक फंगल डिजीज है। जो म्यूकरमायोसिस नाम के फंगस से होता है। ये ज्यादातर उन लोगों को होता है, जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी मेडिसिन ले रहे हों जो इम्यूनिटी को कम करती हो या शरीर के दूसरी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करती हों।

ये शरीर में कैसे पहुंचता है?

वातावरण में मौजूद ज्यादातर फंगस सांस के जरिए हमारे शरीर में पहुंचते हैं। अगर शरीर में किसी तरह का घाव है या शरीर कहीं जल गया है तो वहां से भी ये इंफेक्शन शरीर में फैल सकता है। अगर शुरुआती दौर में ही इसका पता नहीं लगाया गया तो आंखों की रोशनी जा सकती है या फिर शरीर के जिस हिस्से में ये फंगस फैले हैं, वो हिस्सा सड़ सकता है।

ब्लैक फंगस कहां पाया जाता है?

ये फंगस वातावरण में कहीं भी रह सकता है, खासतौर पर जमीन और सड़ने वाले ऑर्गेनिक मैटर्स में। जैसे पत्तियों, सड़ी लकड़ियों और कम्पोस्ट खाद में यह पाया जाता है।

इसके लक्षण क्या हैं?

शरीर के जिस हिस्से में इंफेक्शन है, उस पर इस बीमारी के लक्षण निर्भर करते हैं। चेहरे का एक तरफ से सूज जाना, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना, जो बहुत ही तेजी से गंभीर हो जाते हैं। .

ये इंफेक्शन किन लोगों को होता है?

ये उन लोगों को होता है जो डायबिटिक हैं, जिन्हें कैंसर है, जिनका ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ हो, जो लंबे समय से स्टेरॉयड यूज कर रहे हों, जिन्हें कोई स्किन इंजरी हो, प्रिमेच्योर बेबी को भी ये हो सकता है। जिन लोगों को कोरोना हो रहा है, उनका भी इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। अगर किसी हाई डायबिटिक मरीज को कोरोना हो जाता है तो उसका इम्यून सिस्टम और ज्यादा कमजोर हो जाता है। ऐसे लोगों में ब्लैक फंगस इंफेक्शन फैलने की आशंका और ज्यादा हो जाती है।

ये फंगस कितना खतरनाक है?

ये फंगस एक से दूसरे मरीज में नहीं फैलता है, लेकिन ये कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके 54% मरीजों की मौत हो जाती है। यह फंगस जिस एरिया में डेवलप होता है, उसे खत्म कर देता है। समय पर इलाज होने पर इससे बच सकते हैं।

इससे कैसे बचें?

कंस्ट्रक्शन साइट व डस्ट वाले एरिया में न जाएं, गार्डनिंग या खेती करते वक्त फुल स्लीव्स से ग्लब्ज पहने, मास्क पहने, उन जगहों पर जाने से बचें, जहां पानी का लीकेज हो, जहां ड्रेनेज का पानी इकट्ठा हो। जिन्हें कोरोना हो चुका है, उन्हें पॉजिटिव अप्रोच रखना चाहिए। कोरोना ठीक होने के बाद भी रेगुलर चैकअप कराते रहें। यदि फंगस के कोई भी लक्षण दिखें तो तत्काल डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इससे ये फंगस शुरुआती दौर में ही पकड़ में आ जाएगा और इसका समय पर इलाज हो सकेगा।

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