पहली बार वैज्ञानिकाें ने बनाया मिनी हार्ट: यह 25 दिन के भ्रूण की तरह धड़कता है, विशेषज्ञ बाेले-अब दिल की हर बीमारी का राज खुलेगा

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विएनाएक दिन पहले

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इस शोध से दिल की जन्मजात बीमारी का भी पता चल जाएगा।

  • ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल पर 12 साल चले शोध के बाद बनाया कृत्रिम दिल

वैज्ञानिकों ने पहली बार लैब में एक कृत्रिम ‘मिनी हार्ट’ विकसित किया है। मानव स्टेम सेल से बना तिल के बीज के आकार का (2 मिलीमीटर) यह कृत्रिम दिल 25 दिन के इंसानी भ्रूण में धड़कने वाले हृदय की नकल करता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सफलता के बाद वे दिल से जुड़ी कई बीमारियों के रहस्य को जान सकेंगे। यहां तक कि दिल का दौरा पड़ने के बाद शिशुओं के दिल क्यों नहीं झुलसते, इसका भी पता चल जाएगा। ऑस्ट्रिया साइंस एकेडमी के वैज्ञानिकों की टीम ने इसे बनाया है।

दरअसल, वैज्ञानिकाें की टीम यह शाेध करने में जुटी थी कि भ्रूण में दिल की बीमारी कैसे विकसित हाेती है। भ्रूण में जन्मजात हृदय दोष सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। प्रसिद्ध बायाेइंजीनियर जेन मा कहते हैं कि दिल की जन्मजात बीमारी और इंसानाें के दिल के कई राज खाेलने में यह तकनीक कारगर साबित हाेगी। अब तक पशु माॅडल पर निर्भर रिसर्च के क्रम में यह अब तक की सबसे महत्वपूर्ण खाेज है।

मिशिगन यूनिवर्सिटी के स्टेम सेल विज्ञानी एटाेर एगुइरे कहते हैं कि पिछले 10 साल में दिमाग, लिवर जैसे कई अंग लैब में विकसित किए गए हैं, लेकिन यह सबसे सटीक है। धड़कते हुए इंसानी दिल काे जिस तरह ऑर्गेनाइड किया गया है, वह बिल्कुल असल जैसा ही है। इसमें सभी ऊतक और काेशिकाएं न सिर्फ विकसित हुईं बल्कि अपने आप ही संरचना में ढलकर वास्तविक आकार भी लेने लगीं।

प्रमुख शोधकर्ता डाॅ. साशा मेंडजन कहते हैं कि जब मैंने इसे पहली बार देखा, तो मुझे आश्चर्य हुआ कि ये चैंबर्स अपने आप बन सकते हैं। ऑर्गेनाइड जब अपनी कार्यावस्था में आ गए ताे मैं सबसे ज्यादा खुश हुआ कि हमारा शाेध सफल रहा। यह मिनी हार्ट लैब में 3 महीने से अधिक समय तक जीवित रहे हैं 12 साल बाद हमारी मेहनत रंग लाई। हमने आर्गेनाइड के टुकड़ाें काे भी फ्रीज कर दिया है ताकि आगे और नई रिसर्च काे बढ़ावा मिले।

शोधकर्ता का दावा: हमने इसे दोबारा बनाकर पूरी तसल्ली कर ली

प्रमुख शोधकर्ता डॉ. साशा मेंडजन कहते हैं कि जब तक आप इसे फिर से नहीं बना सकते, तब तक आप किसी चीज को पूरी तरह से नहीं समझ सकते। हमने ऐसा दोबारा कर दिखाया। हालांकि, इसके पहले चीन के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम दिल बनाने का दावा किया था लेकिन वह स्टेम सेल से नहीं बना था। इसमें रॉकेट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था। इसे बनाने में चुंबकीय और द्रव लेविटेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। इसके कारण मशीन में घर्षण नहीं होता और काम करने की क्षमता बढ़ती है।

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