महिला हृदय रोगियों पर पहली ग्लोबल रिपोर्ट: भारत में 3% और चीन में 10% महिलाएं हृदय रोग से पीड़ित, लैंसेट जर्नल की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने किया दावा

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एक मिनट पहले

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  • वैज्ञानिकों का लक्ष्य 2030 तक हृदय रोगों से होने वाली महिलाओं की 35% मौतों को घटाना है
  • महिलाओं में हृदय रोगों के सबसे ज्यादा मामले मध्य एशिया, पूर्वी यूरोप से हैं

दुनियाभर में 1990 के बाद से महिलाओं में होने वाले हृदय रोगों के मामलों में 4.3 फीसदी की कमी आई है, लेकिन भारत में इसके मामले बढ़े हैं। भारत में 3 फीसदी और चीन में 10 फीसदी महिलाएं हृदय रोगों से जूझ रही हैं। वहीं, इंडोनेशिया में यह आंकड़ा 7 फीसदी है। यह दावा लैंसेट जर्नल में पब्लिश रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट को ‘लैंसेट वूमेन एंड कार्डियोवेस्कुलर डिजीज कमीशन: रिड्यूसिंग द ग्लोबल बर्डन बाय 2030’ नाम दिया गया है। शोधकर्ताओं का लक्ष्य 2030 तक महिलाओं में हृदय रोगों से होने वाली 35 फीसदी मौतों को घटाना है। 2019 में हृदय रोगों से जूझने वाली महिलाओं में 47 फीसदी मौतों की वजह इस्केमिक हार्ट डिजीज है। वहीं, 37 फीसदी मौतें स्ट्रोक के कारण हुईं।

हृदय रोगों से सबसे ज्यादा मौतें यहां हुईं
महिलाओं में हृदय रोगों के सबसे ज्यादा मामले मध्य एशिया, पूर्वी यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मिडिल ईस्ट में सामने आए हैं। यहां एक लाख आबादी पर 300 महिलाओं की हृदय रोग के कारण मौत हुई। वहीं, सबसे कम मृत्यु दर ऑस्ट्रेलिया, पश्चिमी यूरोप, लैटिन अमेरिका और उत्तरी अमेरिका जैसे अधिक आय वाले क्षेत्र में रही।

11 देशों की 17 महिला विशेषज्ञों ने की रिसर्च
रिसर्च रिपोर्ट कहती है, 2019 में 27.5 करोड़ महिलाएं दुनियाभर में हृदय रोगों से जुड़ी बीमारियों से परेशान थीं। अध्ययन का लक्ष्य महिलाओं में हृदय रोगों के मामले घटाने को घटाना है। महिलाओं में हृदय रोग पर जारी यह अपनी तरह की पहली रिसर्च रिपोर्ट है। इसमें 11 देशों की 17 महिला विशेषज्ञ शामिल थीं।

सलाह-महिलाओं को अधिक शिक्षित करने की जरूरत
शोधकर्ताओं ने महिलाओं में मौत के मामले घटाने के लिए कई सलाह दी हैं। इनके मुताबिक, महिलाओं को अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने के साथ रोग का समय से पता लगाने की जरूरत है। इसके अलावा इन्हें शिक्षित करने के साथ अधिक आबादी वाले क्षेत्र में स्वास्थ्य से जुड़े कार्यकमों के जरिए जागरुकता बढ़ाने की जरूरत है।

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