वैक्सीन के बाद अब देश में दवाइयों के स्टॉक में भी आई कमी, ग्रामीण इलाकों के हालात सबसे खराब- रिपोर्ट

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भारत में कोरोना की दूसरी लहर का असर थोड़ा कम जरुर हुआ है लेकिन अभी भी एक बड़ी आबादी रोजाना इस संक्रमण का शिकार हो रही है. इस महामारी के दौरान देश की स्वास्थ्य सेवा को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं. देश पहले ही वैक्सीन की कमी से जूझ रहा है, और अब ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में दवाइयों की भी शॉर्टेज हो गयी है. इसमें कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड्स, एंटी-फंगल ड्रग्स और विटामिन शामिल हैं. यहां तक कि सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाली पेरासिटामोल की भी कमी होने की बात कही जा रही है. 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना की खतरनाक दूसरी लहर के दौरान देश में वैक्सीन के बाद अब कई जरूरी दवाइयों की शॉर्टेज हो गयी है और कई स्टॉक में उपलब्ध ही नहीं हैं. छोटे शहरों में इन दवाइयों की बहुत ज्यादा कमी है जबकि ग्रामीण इलाकों की हालात तो और भी बदतर है. कोरोना महामारी के दौरान इन दवाइयों की मांग सप्लाई से कहीं अधिक है.

इन दवाइयों की मैन्युफेक्चरिंग में लगने वाले समय के चलते नए स्टॉक की सप्लाई में अभी 15 से 20 दिन का वक्त लग सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पेरासिटामोल के साथ साथ फेविपिरावीर और रेमेडिसिवीर की कमी का मुख्य कारण जमाखोरी है. साथ ही कई लोगों ने कोरोना से डर के चलते घबराहट में इन दवाइयों को खरीदा हो सकता है.   

दिल्ली और मुंबई में स्टॉक में नहीं है ब्लैक फंगस की दवाई 

कोरोना के साथ साथ इससे मरीजों में मिल रहे ब्लैक फंगस की दवाइयों के स्टॉक में कमी आयी है. इसके इलाज में एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन मुख्य तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है. दिल्ली और मुंबई समेत कई शहरों में ये स्टॉक में उपलब्ध नहीं है. हालांकि फ़ार्मा कंपनी सिप्ला और भारत सिरम इन दवाइयों के उत्पादन में तेजी लाने का भरपूर प्रयास कर रहीं हैं.  

बता दें कि पिछले कुछ महीनों में कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटी वायरल दवाइयों फेविपिरावीर और रेमेडिसिवीर इंजेक्शन के साथ साथ टोसिलिजुमैब (Tocilizumab) इंजेक्शन की सप्लाई में बेहद कमी दर्ज की गयी है. मरीजों को इस दवा को प्राप्त करने में खासी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है. देश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच एंटीबायोटिक्स में एजीथ्रोमायसिन और डोक्सीसायक्लीन स्टेरॉयड्स में डेक्सामेथासोन और लिपोसोमाल एम्फोटेटरिसिन बी जैसे एंटी फंगल के साथ साथ विटामिन सी और जिंक जैसे इम्यूनिटी बूस्टर की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ गयी है.    

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