आज का इतिहास: परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता के लिए जनसंख्या दिवस शुरू हुआ, फिर भी 34 साल में 5 अरब से 7.8 अरब हुई दुनिया की आबादी

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कुछ ही क्षण पहले

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11 जुलाई 1987। इस दिन दुनिया की जनसंख्या 5 अरब हो गई थी। पूरी दुनिया के लिए तेजी से बढ़ती आबादी चिंता का सबब थी। यूनाइटेड नेशंस ने बढ़ती आबादी को काबू करने और परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 11 जुलाई 1989 को एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में पहली बार विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया।

अगले साल यूनाइटेड नेशंस ने इस दिन को हर साल मनाने की घोषणा की और 1990 में 90 से ज्यादा देशों में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया। तबसे हर साल दुनियाभर के अलग-अलग देश इस दिन को मनाते आ रहे हैं। हर साल अलग-अलग थीम पर इस दिन को मनाया जाता है।

दरअसल विश्व की जनसंख्या को 1 अरब तक पहुंचने में हजारों साल लगे थे। इसके बाद करीब 200 साल में ही ये 7 गुना तक बढ़ गई। इसके पीछे मेडिकल साइंस में सुधार होना, मृत्यु दर में कमी आना और जन्म दर बढ़ना जैसे कई कारण हैं।

आज दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी एशियाई देशों में है। जनसंख्या के लिहाज से चीन और भारत पहले और दूसरे नंबर पर हैं। Worldometer के मुताबिक भारत की आबादी 1.39 अरब है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर मिनट 25 बच्चे पैदा होते हैं। अगर इसी रफ्तार से हमारी आबादी बढ़ती रही तो आने वाले 10 साल में भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होगा।

2023 तक दुनिया की आबादी 8 अरब होने का अनुमान है और 2057 तक ये आंकड़ा 10 अरब को पार कर जाएगा।

2023 तक दुनिया की आबादी 8 अरब होने का अनुमान है और 2057 तक ये आंकड़ा 10 अरब को पार कर जाएगा।

हालांकि, जागरूकता अभियानों की वजह से जनसंख्या वृद्धि की दर को काफी हद तक कंट्रोल किया गया है।

1970 के दशक के शुरुआती सालों में जहां हर महिला के औसतन 4.5 बच्चे होते थे, वहीं 2015 में आंकड़ा 2.5 के औसत पर आ गया है। ये राहत भरा आंकड़ा जरूर है लेकिन हमें अपने प्रयासों को और बढ़ाने की जरूरत है।

2006: मुंबई में आतंकी हमला

11 जुलाई, 2006 की शाम। जगह – मुंबई। लाखों नौकरीपेशा लोग काम खत्म कर लोकल ट्रेनों से घर लौट रहे थे। अचानक 6 बजकर 20 मिनट पर चर्चगेट से बोरीवली जाने वाली ट्रेन में खार और सांता क्रूज के बीच बम धमाका हुआ।

इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता अलग-अलग ट्रेनों में धमाके की खबर आने लगी। अगले कुछ ही मिनटों में 7 बम धमाके हुए। 189 लोग मारे गए और करीब 800 जख्मी हुए। ये सभी ब्लास्ट मुंबई की लोकल ट्रेनों के फर्स्ट क्लास डिब्बों में हुए थे।

खार, बांद्रा, जोगेश्वरी, माहिम, बोरीवली, माटुंगा और मीरा-भायंदर रेलवे स्टेशनों के पास ये ब्लास्ट हुए थे। जांच में खुलासा हुआ कि ट्रेनों में लगाए गए बम आरडीएक्स, अमोनियम नाइट्रेट और फ्यूल ऑइल से बनाए गए थे। नुकसान ज्यादा हो इसलिए इन बमों में कील भी डाली गई थी। सभी बमों को प्रेशर कुकर में लगाकर टाइमर के जरिए उड़ाया गया था।

एटीएस ने बताया कि इन हमलों की साजिश मार्च 2006 में लश्कर-ए-तैयबा के आजम चीमा के बहावलपुर स्थित घर में रची गई थी। यहीं पर एक ट्रेनिंग कैंप में लगभग 50 युवकों को बम बनाने की ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग के बाद इन आतंकियों को अलग-अलग रास्तों से भारत में भेजा गया। एटीएस ने इन धमाकों की जांच शुरू की। जांच के बाद पाया गया कि इस हमले में प्रतिबंधित संगठन इंडियन मुजाहिदीन का हाथ था। 4 महीने बाद इस केस में पहली चार्जशीट 30 नवंबर 2006 को दायर की गई। इसके बाद एक पूरक चार्जशीट और दायर की गई। एटीएस ने 200 से भी ज्यादा गवाहों को अदालत में पेश किया।

धमाका इतना ताकतवर था कि ट्रेन के डिब्बे चपटे हो गए थे। शवों को बाहर निकालने के लिए गैस कटर से डिब्बों को काटा गया।

धमाका इतना ताकतवर था कि ट्रेन के डिब्बे चपटे हो गए थे। शवों को बाहर निकालने के लिए गैस कटर से डिब्बों को काटा गया।

ये लोग मुंबई में अलग-अलग जगहों पर कुछ दिन रहे और धमाके को अंजाम देने की तैयारी करने लगे। धमाके के लिए आरडीएक्स गुजरात में कांडला के रास्ते भारत लाया गया था। मुंबई से अमोनियम नाइट्रेट खरीदा गया। सांता क्रूज की अलग-अलग दुकानों से आठ प्रेशर कुकर खरीदे गए।

बम तैयार होने के बाद धमाके वाले दिन आतंकी सात अलग-अलग गुट में बंटे। हर गुट को अलग-अलग लोकेशन को निशाना बनाना था। एटीएस ने 13 लोगों को मामले में आरोपी बनाया। 9 साल बाद 2015 में 12 लोगों को दोषी पाया गया। एक आरोपी को बरी कर दिया गया। 12 में से 5 को फांसी की सजा सुनाई गई और बाकी को उम्रकैद की।

11 जुलाई के दिन इतिहास में किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है…

2011: नेपचून ग्रह ने अपनी खोज के बाद पहली परिक्रमा पूरी की।

2008: एपल ने 3जी आईफोन रिलीज किया।

1985: कोका कोला कंपनी ने कोक में बदलाव कर ‘न्यू कोक’ को मार्केट में उतारा। जनता ने इसे नकार दिया और कंपनी को दोबारा पुरानी कोक ही मार्केट में लानी पड़ी।

1960: अमेरिकन ऑथर हार्पर ली की क्लासिक रचना ‘टू किल अ मॉकिंगबर्ड’ प्रकाशित हुई।

1859: लंदन क्लॉक टॉवर की घंटी ‘बिग बेन’ को पहली बार बजाया गया।

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