जानिए सरहद पर कैसे तैनात हैं जवान: 49 डिग्री तापमान में मुस्तैद महिला जवान बोलीं- गर्मी नहीं, दुश्मनों पर निगाह

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11 मिनट पहलेलेखक: मांगीलाल स्वामी / राकेश वर्मा भारत-पाक सीमा से

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देश की सबसे गर्म सीमा चौकी पर तैनात बीएसएफ जवान।

भारत-पाक बॉर्डर से सटी श्रीगंगानगर (राजस्थान) की एक सीमा चौकी, पारा 49.6 डिग्री (संभवत: देश की सबसे गर्म सीमा चौकी), दिन- शुक्रवार। सीमा पर इस समय कोरोना, भीषण गर्मी और पंजाब से आ रहा प्रदूषित पानी हमारे सैनिकाें के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी बीएसएफ इन सबसे न केवल लड़ रही है, बल्कि विजय भी हासिल कर रही है।

बीएसएफ के इसी जज्बे व शौर्य से नजदीक से रूबरू होने के लिए भास्कर टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लेकर एक दिन बीएसएफ सीमा चौकी पर बिताया। सामने आया कि पाकिस्तान से लड़ने को जैसे बीएसएफ जवान हर समय इनसास व एसएलअार अपने साथ रखते हैं, ठीक वैसे ही अब गर्मी का मुकाबला करने के लिए नींबू व ग्लूकोज पानी भी जवानों के अचूक हथियार साबित हो रहे हैं।

इतना ही नहीं, बीएसएफ ने इन दिनों मौसम के हिसाब से जवानों के खान-पान, रहन-सहन में भी काफी बदलाव किए हैं। मकसद यही है कि वे खुद को तंदुरुस्त रखते हुए सरहद पर मुस्तैद रह सके, ताकि हम अपने घरों में महफूज रहें। पढ़िए बीएसएफ की दिनचर्या पर स्पेशल रिपोर्ट…

सुबह 4 बजे- इस समय बीएसएफ जवानों को उठाया जाता है। सुबह 5 बजे तक हर सीमा चौकी पर जवानों को नियमित रूप से योग और शारीरिक अभ्यास करवाया जाता है। योग के लिए बीएसएफ ने कुछ जवानों को विशेष ट्रेनिंग भी दिलाई है। योग व अभ्यास जवानों को तनाव मुक्त रहने में तो मदद करता ही है, साथ ही किसी भी तरह के संक्रमण से भी बचाता है।

सुबह 6 बजे- मैस में सोशल डिस्टेंसिंग रखते हुए सभी को नाश्ता कराया जाता है। गर्मी काे देखते हुए मैन्यू में बदलाव किया गया है। अब जवानों को छाछ, दही के साथ-साथ राबड़ी और भीगे चने भी दिए जाते हैं।

सुबह 7 बजे- पहली पारी की गश्त इसी समय शुरू होती है। हर टुकड़ी में 5 से 7 जवान होते हैंं। सभी को अपने साथ दो लीटर ग्लूकोज पानी तथा दो नींबू रखना अनिवार्य होता है। इसके अलावा मास्क और साेशल डिस्टेंसिंग भी रखनी होती है।

दोपहर 1 बजे- गश्त के लिहाज से ये 4 से 5 घंटे काफी चुनौैतीपूर्ण रहते हैं, क्योंकि दोपहर 12 बजे से गर्म हवाएं शुरू हो जाती हैं। जवानों को भरपूर सलाद, दही, हरी सब्जी व कच्चा प्याज खिलाकर गश्त पर भेजा जाता है। दोपहर 3 बजे तक तापमान 49.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच जाता है।

तारबंदी के पास महिला जवान भी पुरुषों के साथ मुस्तैदी से ड्यूटी कर रही हैं। महाराष्ट्र के भद्रा जिले की मीनाक्षी से पूछा, यहां की गर्मी कैसे सहन करती हैं… जवाब मिला, हमारी नजरें लू और गर्म हवाओं से ज्यादा दुश्मनों और घुसपैठियों पर होती हैं। गश्ती दल के प्रभारी चांदसिंह बताते हैं- ‘जैसे ही तेज आंधी या बारिश आती है, हम और ज्यादा सतर्क हो जाते हैं। इसकी वजह यह है कि दुश्मन देश ऐसे ही मौके का फायदा उठाने की फिराक में रहता है और हम उसे घुसपैठ का एक भी मौका नहीं देना चाहते।

इसलिए ये 4 बदलाव भी हुए…

1. लू से बचाव के लिए लगाए डक्टिंग कूलर

गश्त के दौरान किसी काे गर्मी लग जाए ताे उसे डक्टिंग कूलर लगे हॉल में रखा जाता है। इनमें तापमान 25-30 डिग्री रहता है। जवान आराम भी इसी हाॅल में करते हैं, ताकि पर्याप्त नींद ले सकें और तनाव मुक्त ड्यूटी कर सकें।

2. चौकियों पर सबमर्सिबल पंप व थ्रीलेयर फिल्टर

अप्रैल-मई में इलाकों की प्रमुख नहरें मरम्मत के लिए बंद रहती हैं। इस दौरान पंजाब से सिर्फ पेयजल सप्लाई होता है, जो काफी दूषित रहता है। ऐसे में हर चौकी पर सबमर्सिबल पंप अाैर थ्री लेयर फिल्टर सिस्टम लगाए गए हैं।

3. 24 घंटे बिजली के लिए सोलर और जेनरेटर

सीमा चौकियों पर बिजली कम ही कटती है, फिर भी आंधी-तूफान और तेज बारिश से निपटने के लिए साेलर सिस्टम और जनरेटर भी लगे हैं। इससे 24 घंटे बिजली रहती है और पाक की ओर निगरानी भी मुस्तैदी से हो पाती है।

4. चौकियों पर सलाद व दूध की सप्लाई बढ़ाई

गर्मी से जवानाें काे लड़ने की ताकत मिले, इसके लिए उन्हें छाछ व रबड़ी भरपूर मात्रा में दी जा रही है। दूध, दही और सलाद की सप्लाई भी बढ़ाई गई है। पैट्रोलिंग गाड़ियां भी पर गश्ती टोलियों को पानी सप्लाई करती रहती है।

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