पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: माता-पिता को बच्चे की कस्टडी मिले यह जरूरी नहीं, ऐसे मामलों में बच्चे का हित देखना सबसे महत्वपूर्ण

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  • It Is Not Necessary For The Parents To Get The Custody Of The Child, In Such Cases It Is Most Important To Look After The Interest Of The Child.

चंडीगढ़10 मिनट पहलेलेखक: ललित कुमार

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बच्चे की कस्टडी से जुड़े एक मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि यह जरूरी नहीं कि कस्टडी माता-पिता को ही मिले। इन मामलों में बच्चे का हित देखना सबसे जरूरी है। अदालतों को इन मामलों में माता पिता के अधिकार और बच्चे के हित के बीच तालमेल बैठाना होता है। नाबालिग बच्चे की परिस्थितियों पर निर्भर करता है कि उसकी कस्टडी किसे दी जाए। इसमें सबसे जरूरी यह देखना है कि बच्चे का हित किसमें है।

जस्टिस संत प्रकाश ने मां की तरफ से 5 साल की अपनी लड़की की रिहाई के लिए दाखिल याचिका को खारिज करते हुए कहा कि लड़की दादा दादी के पास अपनी मर्जी से रह रही है। लड़की ने बठिंडा के चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट को भी अपने बयान में कहा कि वह दादा-दादी के पास रहना चाहती है। ऐसे में लड़की को जबरन रखने का सवाल ही नहीं है।

बठिंडा निवासी महिला की तरफ से याचिका दायर कर कहा गया कि उसकी 5 साल की लड़की को दादा दादी ने अपने घर पर जबरन रखा हुआ है। ऐसे में लड़की को रिहा कर उसकी कस्टडी दी जाए। लड़की की दादा दादी की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि महिला ने खाने में जहर देकर अपने पति उनके बेटे को मार दिया।

इस मामले में 2 जून 2020 को पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की थी। लड़की को मां ने उनके पास छोड़ दिया और वह चली गई। ऐसे में लगाए गए आरोप निराधार हैं लिहाजा याचिका को खारिज किया जाए। महिला की तरफ से इस पर कहा गया कि पुलिस इस मामले में उसे क्लीन चिट दे चुकी है और कैंसिलेशन रिपोर्ट दी जा चुकी है। ऐसे में लड़की की कस्टडी उसे दी जाए।

कस्टडी का मतलब फिजिकल कस्टडी ही नहीं
हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कस्टडी का मतलब फिजिकल कस्टडी ही नहीं, बल्कि उस बच्चे की देखभाल, निगरानी और हित सहित सभी पहलुओं को देखना है।

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