सिद्धू पर कलह के बीच दिल्ली पहुंचे 4 मंत्री: वेणुगोपाल से मिलकर रंधावा बोले- पंजाब चुनाव कांग्रेस के नाम पर लड़ेंगे; शाम को स्क्रीनिंग कमेटी की मीटिंग

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चंडीगढ़3 मिनट पहले

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डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा

पंजाब कांग्रेस में नवजोत सिद्धू को लेकर मची कलह के बीच 4 मंत्री दिल्ली पहुंचे। इनमें डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा, भारत भूषण आशु, परगट सिंह और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग शामिल रहे। उन्होंने दिल्ली में पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की। मीटिंग के बाद डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि पंजाब में कांग्रेस के नाम पर चुनाव लड़ा जाएगा। कांग्रेस ही चुनाव में चेहरा होगी। उन्होंने नवजोत सिद्धू की खुद को CM चेहरा बनाए जाने की मांग के सवाल पर यह जवाब दिया।

यह बात इसलिए अहम है क्योंकि शाम को दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी की अहम मीटिंग है। इसमें कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली लिस्ट पर मुहर लग सकती है। इसमें हिस्सा लेने के लिए सिद्धू भी दिल्ली जाएंगे। उससे पहले पूरा मामला हाईकमान को बताया गया है।

कांग्रेस पंजाब में जाखड़, सिद्धू और चन्नी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है

कांग्रेस पंजाब में जाखड़, सिद्धू और चन्नी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है

बयानबाजी के बजाय पार्टी फोरम पर बात रखें नेता

सूत्रों के मुताबिक इस मीटिंग में कांग्रेस हाईकमान ने एतराज जताया कि नेता पार्टी फोरम या हाईकमान के बजाय सीधे मीडिया में जाकर बयानबाजी कर रहे हैं। पहले मंत्री आशु ने सिद्धू के खिलाफ बयान दिए थे। उसके बाद रंधावा भी सिद्धू के रवैये पर बिफर गए। इसके बाद उन्होंने यहां तक कह दिया था कि फिलहाल चन्नी ही CM चेहरा हैं। किसी दूसरे चेहरे के बारे में चुनाव परिणाम के बाद MLA फैसला कर लेंगे। इस मीटिंग में रंधावा के सिद्धू के लिए गृह मंत्रालय छोड़ने की पेशकश के बारे में भी हाईकमान ने नोटिस लिया है। हालांकि इन नेताओं ने भी सिद्धू के रवैये की शिकायत की कि सरकार को लगातार निशाना बनाने से चुनाव में नुकसान हो सकता है। संभव है कि इसके बारे में हाईकमान सिद्धू से बात करेगी।

आशु और रंधावा सिद्धू विरोधी, परगट और वड़िंग करीबी

दिल्ली पहुंचे मंत्री भारत भूषण आशु और डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा इन दिनों सिद्धू के खिलाफ मोर्चा खोलकर बैठे हैं। उनका कहना है कि सिद्धू का काम कांग्रेस कल्चर के हिसाब से ठीक नहीं है। वह सिर्फ ‘मैं’ की बात करते हैं जबकि उन्हें पार्टी की बात करनी चाहिए। रंधावा ने तो दो दिन पहले गृह मंत्रालय छोड़ने तक की पेशकश कर दी थी। वहीं, दूसरे दो मंत्री परगट सिंह और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग सिद्धू के करीबी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सिद्धू के पक्ष-विपक्ष के मंत्री हाईकमान की राय लेने पहुंचे थे ताकि चुनाव से पहले चेहरे के घमासान पर स्थिति स्पष्ट हो सके।

जातीय समीकरण अलग, इसलिए किसी एक चेहरे पर दांव नहीं

पंजाब में किसी एक नेता को सीएम चेहरा घोषित करने से पार्टी के भीतर गुटबाजी का खतरा तो है ही लेकिन बड़ी मुश्किल जातीय समीकरण से है। सिद्धू पंजाब में कांग्रेस के पॉपुलर चेहरा जरूर हैं जो भीड़ खींच लाते हैं लेकिन वोट बैंक के गणित में CM चरणजीत चन्नी भारी हैं। सीएम चन्नी पंजाब के पहले अनुसूचित जाति के सीएम हैं, जिनके जरिए कांग्रेस 32% SC वोट बैंक पर नजर लगाकर बैठी है।

वहीं, सुनील जाखड़ बड़ा हिंदू चेहरा हैं, जिनके जरिए शहरी क्षेत्र के करीब 38% हिंदू वोट बैंक पर दांव खेला जा रहा है। कांग्रेस चाहती है कि चुनाव में सिद्धू, चन्नी और जाखड़, तीनों ही कांग्रेस का चेहरा हों। हालांकि सूत्रों का यह भी कहना है कि कांग्रेस किसी एक को चेहरा घोषित करने के बारे में भी विचार कर सकती है।

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