Euro Cup 2020: फुटबॉल का पावर हाउस होने के बावजूद इंग्लैंड कभी जीत नहीं सका यूरो कप, जानिए वजह?

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नई दिल्ली. यूरो कप 2020 का आगाज 11 जून से होने जा रहा है. इस बार फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, बेल्जियम, पुर्तगाल के साथ इंग्लैंड की टीम भी चैंपियन बनने की दावेदार है. हालांकि विश्व कप मुकाबलों में अक्सर इंग्लैंड की टीम चोकर साबित होती है. फीफा वर्ल्ड कप 2018 में इंग्लैंड की टीम चौथे स्थान पर रही थी. इस बार उम्मीद है कि कोच गेरेथ साउथगेट की अगुवाई में इंग्लैंड की टीम पहली बार यूरो कप का खिताब जीतने में सफल हो सकती है. वर्तमान में फीफा वर्ल्ड रैंकिंग में इंग्लैंड चौथे स्थान पर है.

यूरो कप में इंग्लैंड का प्रदर्शन

अब तक 15 बार यूरो कप खेला गया है. पहले यूरो कप (1960) में इंग्लैंड ने हिस्सा नहीं लिया था. इसके अलावा इंग्लैंड की टीम 1964, 1972, 1976 और 2008 में क्वालीफाई नहीं कर पाई थी. इंग्लैंड का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन यूरो कप 1968 में रहा जब उसने सोवियत यूनियन को 2-0 से हराकर तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया. इसके अलावा इंग्लैंड की टीम यूरो कप 1996 के सेमीफाइनल में भी पहुंचने में सफल रही. सेमीफाइनल में जर्मनी ने पेनल्टी शूटआउट में इंग्लैंड को 6-5 से मात दी थी. यूरो कप 2016 में इंग्लिश टीम राउंड ऑफ 16 में ही हारकर बाहर हो गई.

टॉप-10 कीमती क्लब में इंग्लैंड के पांचइंग्लैंड और स्पेन को फुटबॉल का पावर हाउस माना जाता है. इंग्लिश प्रीमियर लीग (EPL) के पैसे के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी लीग है. खिलाड़ियों के प्रदर्शन के हिसाब से भी टॉप लीग है. रिसर्च फर्म केपीएमजी के अनुसार यूरोप के सबसे कीमती टॉप-10 फुटबॉल क्लब की लिस्ट में इंग्लैंड की पांच टीमें हैं. इनमें मैनचेस्टर यूनाइटेड, लीवरपूल, मैनचेस्टर सिटी, चेल्सी और टॉटनहम का नाम है. इसके बावजूद इंग्लैंड आज तक एक बार ही 1966 में फीफा वर्ल्ड कप जीतने में सफल रहा. इसके अलावा 1990 और 2018 में टीम अंतिम चार में पहुंचने में सफल रही.

(फोटो-AP)

लीग फुटबॉल में इंग्लैंड के क्लब का दबदबा लेकिन खिलाड़ियों का नहीं

पिछले तीन सालों में यूएफा चैंपियंस का खिताब दो बार ईपीएल की टीमों ने जीता है. साल 2018-19 में लीवरपूल ने टॉटनहम और इस बार मैनचेस्टर सिटी ने चेल्सी को हराकार चैंपियंस लीग का खिताब जीता. ये चारों टीमें ईपीएल की ही हैं. इसके बावजूद इंग्लैंड का कोई खिलाड़ी अपना नाम रोशन करने में नाकाम रहा. लीवरपूल ने जब खिताब जीता था तो उसकी टीम की तरफ से अलिसन सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर चुने गए थे. अलिसन ब्राजील के खिलाड़ी हैं. लीवरपूल के वर्जिक वान डिक सबसे बेहतरीन डिफेंडर चुने गए थे जो नीदरलैंड की तरफ से खेलते हैं. इस साल की बात करें तो यूएफा की टेक्निकल स्टडी ग्रुप ने चैंपियंस लीग 2020-21 में प्रदर्शन के आधार 23 खिलाड़ियों का चुनाव किया जिसमें इंग्लैंड के सिर्फ तीन खिलाड़ी ही शामिल हो पाए.

इंग्लैंड के खिलाड़ियों को सिर्फ ईपीएल खेलने से नुकसान

इंग्लैंड के राष्ट्रीय टीम में अक्सर ईपीएल खेलने वाले खिलाड़ियों को ही चुना जाता है. साल 2018 फीफा वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के सभी खिलाड़ी ईपीएल टीमों से ही थे. यूरोप में स्पेन का ला लीगा, इटली का सिरी ए, जर्मनी का बुंदेसलीगा और फ्रांस का लीग ए मशूहर इंग्लैंड के ईपीएल की तरह मशहूर है. इन लीगों में अक्सर दूसरे देशों के बड़े खिलाड़ी खेलने जाते हैं. जिससे वो विरोधी खिलाड़ियों की ताकत, कमजोरी और मानसिकता को समझ पाते हैं. लेकिन ये मौका इंग्लैंड के खिलाड़ियों को नहीं मिल पाता है. इसके अलावा इंग्लैंड के बड़े स्टार ईपीएल में भी अलग-अलग टीमों से खेलते हैं.

chelsea football champions league final

(Chelsea/Instagram)

जिस समय डेविड बेकहम मैनचेस्टर यूनाइटेड की तरफ से खेल रहे थे, उस समय स्टीव जिरार्ड लीवरपूल और फ्रैंक लैंपार्ड चेल्सी की तरफ से खेल रहे थे. ऐसे में एक टीम के रूप में भी खिलाड़ी एकजुट हो नहीं पाते हैं. इसके उलट जब स्पेन साल 2010 का वर्ल्ड कप जीता था तो उसकी टीम में सात बार्सिलोना के खिलाड़ी थे. जब जर्मनी ने साल 2014 का वर्ल्ड खिताब जीता तो उसकी टीम में बायर्न म्यूनिख की तरफ से खेलने वाले सात खिलाड़ी थे. एक क्लब की ओर से खेलने के कारण स्पेन और जर्मनी के खिलाड़ियों के बीच ज्यादा बेहतर तालमेल था.

इंग्लैंड के फुटबॉलरों को मिलते हैं कम पैसे

फोर्ब्स की सितंबर 2020 की लिस्ट के अनुसार टॉप 10 कमाई करने वाले फुटबॉलरों में इंग्लैंड का कोई खिलाड़ी शामिल नहीं है. ईपीएल का सबसे महंगे खिलाड़ी फ्रांस के मिडफील्डर पॉल पोग्बा हैं. उन्हें मैनचेस्टर यूनाइटेड ने 105 मिलियन यूरो में 2016 में अपनी टीम में शामिल किया था. वहीं इंग्लैंड के महंगे फुटबॉलर हैरी मगुइरे हैं जिनके साथ मैनचेस्टर यूनाइटेड ने साल 2019 में 87 मिलियन यूरो का करार किया था.

(AP)

ग्रुप डी में इंग्लैंड का पलड़ा भारी

इंग्लैंड की टीम ग्रुप डी में क्रोएशिया, चेक रिपब्लिक और स्कॉटलैंड के साथ है. क्रोएशिया की टीम फीफा वर्ल्ड कप 2018 की उपविजेता थी. इसी टीम ने सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर किया था. टीम के पास हैरी कैन, हैरी मगुइरे, मेसन माउंट, काइल वॉकर, जेडन सांचो, जॉर्डन हेडरसन और रहीम स्टर्लिंग जैसे दिग्गज खिलाड़ी हैं. हालांकि हेडरसन और स्टर्लिंग फॉर्म से जूझ रहे हैं. चेल्सी के खिलाफ फाइनल में स्टर्लिंग गोल दागने में नाकाम रहे थे और उनकी काफी आलोचना हुई थी.

इंग्लैंड की 26 सदस्यीय टीम

गोलकीपर-डीन हेंडरसन, जॉर्डन पिकफोर्ड और सैम जॉनस्टोन.

डिफेंडर-ट्रेंट अलेक्जेंडर, बेन चिलवेल, रिसी जेम्स, हैरी मगुइरे, ल्यूक शॉ, टायरोन मिंग्स, जॉन स्टोन्स, काइल वाल्केर, किएरन ट्रिपियर

मिडफील्डर-मेसन माउंट, जूड बेलिंगहम, जेसी लिंगार्ड, जॉर्डन हेडरसन, डेक्कन राइस, केल्विन फिलिप्स

फॉरवर्ड-जेडन सांचो, मार्कस रशफोर्ड, मेसन ग्रीनवुड, रहीम स्टर्लिंग, फिल फोडेन, हैरी केन, जैक ग्रीलिश, डोमिनिक कैल्वर्ट-लेविन





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