अमर उजाला विशेष: वैक्सीन न लेने वाले ज्यादा कोरोना की चपेट में आए कैंसर के मरीज, 14 की मौत

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परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 15 Jul 2021 06:35 AM IST

टीकाकरण केंद्र में टीका लगवाती युवती।
– फोटो : अमर उजाला

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कोरोना टीकाकरण को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां हैं लेकिन इनकी वजह से लोगों को कितना नुकसान हो सकता है इसका खुलासा कैंसर मरीज और टीकाकरण पर हुए अध्ययन में पता चला है। इस अध्ययन के अनुसार टीकाकरण से संबंधित जागरूकता या भय की कमी है जिसकी वजह से वैक्सीन न लेने वाले कैंसर मरीज अधिक संख्या में कोरोना की चपेट में आए हैं। साथ ही इन मरीजों में कोविड-19 की वजह से मृत्यु दर भी काफी देखने को मिली है।

कैंसर रिसर्च एंड स्टैटिक्स मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार डॉक्टरों ने वैक्सीन लेने वाले और एक भी खुराक न लेने वाले कैंसर मरीजों को अलग-अलग समूह में लेकर परीक्षण किया। नई दिल्ली स्थित राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के दो विभागों ने मिलकर 752 मरीजों को अध्ययन में शामिल किया था।

इनमें से 219 यानी 29.1 फीसदी मरीजों ने कम से कम वैक्सीन की एक खुराक ली थी। वैक्सीन की कम से कम एक खुराक ले चुके लोगों में से 34 यानी 15.5 फीसदी मरीजों में कोरोना का संक्रमण मिला, लेकिन इन मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी मिलने की वजह से इन्हें अस्पतालों में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। वहीं दूसरे समूह में 533 यानी 70.9 फीसदी मरीजों ने वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं ली थी। इनमें से 117 यानी 21.9 फीसदी मरीज कोरोना की चपेट में आए और उनमें से 14 यानी 11.9 फीसदी मरीजों की हालत गंभीर देखने को मिली।

कैंसर मरीजों से बातचीत और चिकित्सीय निगरानी के बाद डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला है कि इन मरीजों में टीकाकरण को लेकर भ्रांतियां दूर करना बेहद जरूरी है क्योंकि पिछले वर्ष इसी चिकित्सीय संस्थान के अध्ययन में यह पता चला था कि सामान्य कोरोना मरीजों की तुलना में कैंसर रोगियों में कोरोना का खतरा सात से आठ गुना अधिक है। कैंसर मरीजों में कोरोना वायरस की वजह से मृत्युदर की आशंका भी काफी बढ़ जाती है।

अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. उल्लास बत्रा की निगरानी में हुए इस चिकित्सीय अध्ययन में इस साल मार्च से जून के बीच मरीजों का चयन करते हुए परीक्षण किया गया था। गौर करने वाली बात है कि अध्ययन के दौरान 18 से 44 वर्ष की आयु वाले कैंसर रोगी कम टीकाकरण वाले मिले थे। जबकि 45 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले कैंसर मरीजों ने एक या दो खुराक ले चुके थे।

महिला कैंसर मरीजों का भरोसा अधिक
अध्ययन के दौरान यह देखने को मिला कि कोरोना टीकाकरण पर पुरुषों से अधिक महिला कैंसर रोगियों का भरोसा था। अध्ययन में 106 पुरुष मरीजों ने वैक्सीन लेने की जानकारी दी थी जबकि महिलाओं की संख्या 113 थी।

वैक्सीन न लेने वाले सभी गंभीर मरीजों की मौत
अध्ययन के दौरान जिन 533 मरीजों ने वैक्सीन नहीं ली थी। उनमें से 117 कोरोना की चपेट में आए थे। कैंसर के अलावा कोरोना संक्रमण होने की वजह से इनमें से 14 मरीजों की हालत सबसे अधिक गंभीर हुई जिन्हें अस्पतालों में भर्ती करने के बाद भी बचाया नहीं जा सका। इन सभी 14 मरीजों की अध्ययन के दौरान मौत हो गई। इसीलिए डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना टीकाकरण कैंसर रोगियों के लिए भी सुरक्षित है। इन मरीजों को जल्द से जल्द टीकाकरण करवाना चाहिए ताकि कोरोना वायरस से बचाव किया जा सके। वैक्सीन लगने के बाद अगर कोरोना संक्त्रस्मित होते भी हैं तो भी वह इन मरीजों के लिए जानलेवा साबित नहीं होगा।

विस्तार

कोरोना टीकाकरण को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां हैं लेकिन इनकी वजह से लोगों को कितना नुकसान हो सकता है इसका खुलासा कैंसर मरीज और टीकाकरण पर हुए अध्ययन में पता चला है। इस अध्ययन के अनुसार टीकाकरण से संबंधित जागरूकता या भय की कमी है जिसकी वजह से वैक्सीन न लेने वाले कैंसर मरीज अधिक संख्या में कोरोना की चपेट में आए हैं। साथ ही इन मरीजों में कोविड-19 की वजह से मृत्यु दर भी काफी देखने को मिली है।

कैंसर रिसर्च एंड स्टैटिक्स मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार डॉक्टरों ने वैक्सीन लेने वाले और एक भी खुराक न लेने वाले कैंसर मरीजों को अलग-अलग समूह में लेकर परीक्षण किया। नई दिल्ली स्थित राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के दो विभागों ने मिलकर 752 मरीजों को अध्ययन में शामिल किया था।

इनमें से 219 यानी 29.1 फीसदी मरीजों ने कम से कम वैक्सीन की एक खुराक ली थी। वैक्सीन की कम से कम एक खुराक ले चुके लोगों में से 34 यानी 15.5 फीसदी मरीजों में कोरोना का संक्रमण मिला, लेकिन इन मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी मिलने की वजह से इन्हें अस्पतालों में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। वहीं दूसरे समूह में 533 यानी 70.9 फीसदी मरीजों ने वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं ली थी। इनमें से 117 यानी 21.9 फीसदी मरीज कोरोना की चपेट में आए और उनमें से 14 यानी 11.9 फीसदी मरीजों की हालत गंभीर देखने को मिली।

कैंसर मरीजों से बातचीत और चिकित्सीय निगरानी के बाद डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला है कि इन मरीजों में टीकाकरण को लेकर भ्रांतियां दूर करना बेहद जरूरी है क्योंकि पिछले वर्ष इसी चिकित्सीय संस्थान के अध्ययन में यह पता चला था कि सामान्य कोरोना मरीजों की तुलना में कैंसर रोगियों में कोरोना का खतरा सात से आठ गुना अधिक है। कैंसर मरीजों में कोरोना वायरस की वजह से मृत्युदर की आशंका भी काफी बढ़ जाती है।

अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. उल्लास बत्रा की निगरानी में हुए इस चिकित्सीय अध्ययन में इस साल मार्च से जून के बीच मरीजों का चयन करते हुए परीक्षण किया गया था। गौर करने वाली बात है कि अध्ययन के दौरान 18 से 44 वर्ष की आयु वाले कैंसर रोगी कम टीकाकरण वाले मिले थे। जबकि 45 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले कैंसर मरीजों ने एक या दो खुराक ले चुके थे।

महिला कैंसर मरीजों का भरोसा अधिक

अध्ययन के दौरान यह देखने को मिला कि कोरोना टीकाकरण पर पुरुषों से अधिक महिला कैंसर रोगियों का भरोसा था। अध्ययन में 106 पुरुष मरीजों ने वैक्सीन लेने की जानकारी दी थी जबकि महिलाओं की संख्या 113 थी।

वैक्सीन न लेने वाले सभी गंभीर मरीजों की मौत

अध्ययन के दौरान जिन 533 मरीजों ने वैक्सीन नहीं ली थी। उनमें से 117 कोरोना की चपेट में आए थे। कैंसर के अलावा कोरोना संक्रमण होने की वजह से इनमें से 14 मरीजों की हालत सबसे अधिक गंभीर हुई जिन्हें अस्पतालों में भर्ती करने के बाद भी बचाया नहीं जा सका। इन सभी 14 मरीजों की अध्ययन के दौरान मौत हो गई। इसीलिए डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना टीकाकरण कैंसर रोगियों के लिए भी सुरक्षित है। इन मरीजों को जल्द से जल्द टीकाकरण करवाना चाहिए ताकि कोरोना वायरस से बचाव किया जा सके। वैक्सीन लगने के बाद अगर कोरोना संक्त्रस्मित होते भी हैं तो भी वह इन मरीजों के लिए जानलेवा साबित नहीं होगा।



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