उच्च स्तरीय बैठक में सरकार ने लिए सिख विरोधी फैसले? फेक वीडियो के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

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एक उच्च स्तरीय बैठक में सरकार द्वारा सिख विरोधी फैसले लिए जाने का दावा करते हुए एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसको लेकर दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह एक फर्जी वीडियो है और लोगों में विद्वेष भड़काने के उद्देश्य से इसे वायरल किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल आईएफएसओ के डीसीपी केपीएस मल्होत्रा ने बताया, “सीडीएस जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद प्रसारित किए जा रहे एक फर्जी वीडियो के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। क्योंकि इस वीडियो के जरिए सांप्रदायिक विद्वेष भड़काने की कोशिश की जा रही थी।”

दिल्ली पुलिस ने बताया कब का है वीडियो

केपीएस मल्होत्रा ने बताया कि ये एक फर्जी वीडियो है। उन्होंने कहा, “फर्जी वीडियो में दिखया जा रहा है कि सरकार एक उच्च स्तरीय बैठक में सिख विरोधी फैसले ले रही है। वीडियो सीडीएस जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद 9 दिसंबर, 2021 को हुई कैबिनेट कमेटी की बैठक का था।” बता दें कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा जिसमें दावा किया जा रहा है कि सुरक्षा को लेकर एक कैबिनेट कमेटी की बैठक में सिखों को भारतीय सेना से हटाने पर चर्चा हुई। 

क्या है इस वायरल वीडियो की सच्चाई?

जिन ट्विटर अकाउंट से ये वीडियो शेयर किया जा रहा है वह संभवत: प्रॉक्सी अकाउंट हैं जो पाकिस्तान से संचालित हो रहे हैं। इन अकाउंट से अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि भारतीय सेना से सिख रेजिमेंट को हटाया जा रहा है। लेकिन ये वीडियो और ऑडियो दोनों अलग-अलग हैं। यह एक एडिटेड वीडियो है। इसमें क्लब हाउस ऐप पर किसी की चर्चा के ऑडियो उठाकर जोड़ा गया है। संभवत: ये हरकत किसी बाहरी की लग रही है जो भारत में लोगों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रहा है। इस एडिटेड वीडियो को नवंबर 2021 में बनाए गए और खुद को सिख महिलाओं के रूप में गलत तरीके से चित्रित करते हुए अकाउंट से शेयर किया जा रहा है। 



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