उपलब्धि: रतन टाटा को नए स्टार्टअप्स में निवेश की टिप्स देते हैं शांतनु नायडू, जानें कैसे मिला ये मुकाम

0
89
Article Top Ad


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sun, 13 Jun 2021 11:39 AM IST

सार

शांतनु नायडू ने 28 साल की उम्र में बिजनेस इंडस्ट्री में नया मुकाम हासिल किया है। शांतनु वो शख्स हैं, जो रतन टाटा को नए स्टार्टअप्स में निवेश करने की टिप्स देते हैं। शांतनु की कंपनी मोटोपॉज, कुत्तों के लिए रिफलेक्टर कॉलर बनाती है।

रतन टाटा के साथ शांतनु नायडू
– फोटो : social media

ख़बर सुनें

28 साल के शांतनु नायडू ने छोटी उम्र में ही बिजनेस इंडस्ट्री में एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। शांतनु नायडू ने अपने आइडियाज से देश के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा को भी अपना फैन बना लिया है। शांतनु नायडू की एक कंपनी है, जिसका नाम है मोटोपॉज और ये कंपनी कुत्तों के कॉलर का निर्माण करती है।

ये कॉलर अंधेरे में चमकते हैं ताकि कोई वाहन उन्हें ठोककर मार ना दे। इस कंपनी का आरोप चार देशों में 20 से ज्यादा शहरों में फैला हुआ है। ऐसी खबरें हैं कि रतन टाटा अपना पर्सनल निवेश जिन स्टार्टअप्स में करते हैं, उनके पीछे 28 साल के शांतनु नायडू का दिमाग होता है। आइए शांतनु नायडू के बारे में और जानते हैं…

कुत्तों के लिए बनाया चमकने वाला कॉलर
शांतनु नायडू का कहना है कि उन्होंने कई बार गाड़ियों के नीचे आकर कुत्तों के मरते देखा है। शांतनु का कहना है कि अंधेरे में गाड़ियां कुत्तों को नहीं देख पाती, जिस वजह से ये दुर्घटनाएं होती हैं। इसके बाद शांतनु को रिफलेक्टर कॉलर बनाने का आइडिया आया और मोटोपॉज कॉलर बना दी। इस कॉलर की मदद से ड्राइवर बिना स्ट्रीट लाइट के भी कुत्तों को दूर से देख सकता है। 

टाटा को पसंद आया शांतनु का अविष्कार
बता दें कि रतन टाटा को भी कुत्तों से काफी लगाव है और टाटा समूह के न्यूज लेटर में इसके बारे में लिखा गया। बाद में रतन टाटा पर इसकी नजर पड़ी। शांतनु ने अपने पिता के कहने पर रतन टाटा को पत्र लिखा और जवाब में उन्हें रतन टाटा से मिलने का न्योता मिला। शांतनु से पहले उनकी चार पीढ़िया रतन टाटा के साथ काम कर चुकी थीं लेकिन किसी को भी उनसे मिलने का मौका नहीं मिला। 

रतन टाटा ने स्ट्रीट डॉग्स प्रोजेक्ट की मदद के लिए शांतनु से पूछा लेकिन उन्होंने मना कर दिया। हालांकि रतन टाटा ने जोर देकर निवेश किया और उसके बाद मोटोपॉज की पहुंच 11 अलग-अलग शहरों तक हो गई। अब शांतनु लगातार रतन टाटा से मिलते रहते हैं। 

मोटोपॉज की शुरुआत करने के बाद शांतनु ने कॉर्नेल में एडमिशन लिया। यहां से शांतनु ने एमबीए किया। एमबीए के दौरान उद्यमिता, निवेश, नए स्टार्टअप के साथ-साथ क्रेडिबल स्टार्टअप्स की खोज, इंटरेस्टिंग बिजनेस आइडिया और मुख्य इंडस्ट्री ट्रेंड्स पर पूरा ध्यान लगाकर पढ़ाई की। कोर्स खत्म करने के बाद उन्हें रतन टाटा के साथ काम करने का मौका मिला। शांतनु का कहना है कि ऐसा मौका जिंदगी में पहली बार मिलता है और रतन टाटा के साथ रहकर हर मिनट कुछ ना कुछ सीखने को मिलता है। 

स्टार्टअप्स में रतन टाटा की रुचि ज्यादा
81 साल के रतन टाटा देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में खासा रुचि रखते हैं। जून 2016 में रतन टाटा की प्राइवेट निवेश कंपनी आरएनटी असोसिएट्स और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने स्टार्टअप को मदद करने के लिए हाथ मिलाया था। इसके अलावा उद्यमियों को रतन टाटा के साथ काम करने का मौका भी मिलता है। यही वजह है कि जिन स्टार्टअप्स को रतन टाटा का सपोर्ट मिलता है उनकी वैल्यू तुरंत बढ़ जाती है।

विस्तार

28 साल के शांतनु नायडू ने छोटी उम्र में ही बिजनेस इंडस्ट्री में एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। शांतनु नायडू ने अपने आइडियाज से देश के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा को भी अपना फैन बना लिया है। शांतनु नायडू की एक कंपनी है, जिसका नाम है मोटोपॉज और ये कंपनी कुत्तों के कॉलर का निर्माण करती है।

ये कॉलर अंधेरे में चमकते हैं ताकि कोई वाहन उन्हें ठोककर मार ना दे। इस कंपनी का आरोप चार देशों में 20 से ज्यादा शहरों में फैला हुआ है। ऐसी खबरें हैं कि रतन टाटा अपना पर्सनल निवेश जिन स्टार्टअप्स में करते हैं, उनके पीछे 28 साल के शांतनु नायडू का दिमाग होता है। आइए शांतनु नायडू के बारे में और जानते हैं…

कुत्तों के लिए बनाया चमकने वाला कॉलर

शांतनु नायडू का कहना है कि उन्होंने कई बार गाड़ियों के नीचे आकर कुत्तों के मरते देखा है। शांतनु का कहना है कि अंधेरे में गाड़ियां कुत्तों को नहीं देख पाती, जिस वजह से ये दुर्घटनाएं होती हैं। इसके बाद शांतनु को रिफलेक्टर कॉलर बनाने का आइडिया आया और मोटोपॉज कॉलर बना दी। इस कॉलर की मदद से ड्राइवर बिना स्ट्रीट लाइट के भी कुत्तों को दूर से देख सकता है। 

टाटा को पसंद आया शांतनु का अविष्कार

बता दें कि रतन टाटा को भी कुत्तों से काफी लगाव है और टाटा समूह के न्यूज लेटर में इसके बारे में लिखा गया। बाद में रतन टाटा पर इसकी नजर पड़ी। शांतनु ने अपने पिता के कहने पर रतन टाटा को पत्र लिखा और जवाब में उन्हें रतन टाटा से मिलने का न्योता मिला। शांतनु से पहले उनकी चार पीढ़िया रतन टाटा के साथ काम कर चुकी थीं लेकिन किसी को भी उनसे मिलने का मौका नहीं मिला। 

रतन टाटा ने स्ट्रीट डॉग्स प्रोजेक्ट की मदद के लिए शांतनु से पूछा लेकिन उन्होंने मना कर दिया। हालांकि रतन टाटा ने जोर देकर निवेश किया और उसके बाद मोटोपॉज की पहुंच 11 अलग-अलग शहरों तक हो गई। अब शांतनु लगातार रतन टाटा से मिलते रहते हैं। 


आगे पढ़ें

एमबीए के बाद रतन टाटा के साथ काम करने का मौका मिला



Source