जीवन की खोज : मंगल पर हो सकता है ऑर्गेनिक नमक

0
37
Article Top Ad


ख़बर सुनें

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के क्युरियोसिटी रोवर उपग्रह ने हाल ही में मंगल ग्रह पर ऐसे ऑर्गेनिक तत्व (कंपाउंड) खोज चुका है जिनमें भौगोलिक प्रक्रिया के निशान मिले। अब नासा की टीम ने पाया है कि इस लाल ग्रह पर ऑर्गेनिक सॉल्ट (नमक) भी मौजूद हो सकता है। यदि यह प्रमाण आगे चलकर यहां नमक की खोज कर लेते हैं तो इस ग्रह पर जीवन के निशान स्पष्ट हो जाएंगे।

नासा वैज्ञानिक जेम्स लुईस ने प्रयोगशाला में जांच के बाद कहा, क्युरियोसिटी रोवर में लगे पोर्टबल लैब डाटा के आधार पर ऑगैनिक नमक के संकेत मिले हैं।

नासा के मुताबिक, इस ग्रह पर ऑर्गेनिक तत्वों व नमक प्रक्रिया की मौजूदगी जीवाणुओं के निशान तक हमें ले जा सकती है। नमक मिलने से मंगल पर पहले कभी ऑगैनिक सामग्री रहने की संभावना को बल मिलता है।

साथ ही आज भी वहां जीवन के मुमकिन होने की उम्मीद जगाती है। धरती पर ऐसा जीवन देखा गया है जो ऑगैनिक नमक, ऑग्जलेट और एसेटेट पर निर्भर होता है।

मंगल पर खोज के लिए ऑगैनिक मॉलिक्यूल मिलना नासा के लिए बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि इसके बाद ही यहां जैविक प्रक्रिया के साक्ष्य जुटाए जा सकेंगे। हालांकि मंगल की सतह पर रेडिएशन से ऑगैनिक सामग्री के खत्म होने की चुनौती भी पेश आ सकती है। 

मंगल की सतह पर ड्रिलिंग
नासा के गॉडार्ड अंतरिक्ष उड़ान केंद्र में ऑगैनिक वैज्ञानिक जेम्स लुईस ने बताया, अगर हम मंगल पर कहीं भी ऑगैनिक नमक का पता लगाते हैं तो हमें उन क्षेत्रों में और ज्यादा जांच की जरूरत पड़ेगी।

इसके लिए ग्रह की सतह के नीचे ड्रिलिंग की जरूरत पड़ सकती है जहां ऑगैनिक सामग्री सुरक्षित मिल सकती है। वैज्ञानिक यह पता लगा रहे हैं कि यह सामग्री कब तक इस ग्रह पर अपने निशान सुरक्षित रख सकती है। 

क्या है चुनौती?
क्युरियोसिटी रोवर में लगे उपकरण एसएएम के साथ मंगल पर नमक की भौगोलिक पुष्टि में मुश्किल आ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह उपकरण मंगल की मिट्टी और चट्टान को गर्म करता है जिससे गैसें उत्सर्जित होती हैं। ऐसे में ऑगैनिक नमक के गर्म होने से जो गैसें निकलेंगी, वे मंगल की मिट्टी में किसी भी दूसरी चीज से भी निकल सकती हैं।

विस्तार

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के क्युरियोसिटी रोवर उपग्रह ने हाल ही में मंगल ग्रह पर ऐसे ऑर्गेनिक तत्व (कंपाउंड) खोज चुका है जिनमें भौगोलिक प्रक्रिया के निशान मिले। अब नासा की टीम ने पाया है कि इस लाल ग्रह पर ऑर्गेनिक सॉल्ट (नमक) भी मौजूद हो सकता है। यदि यह प्रमाण आगे चलकर यहां नमक की खोज कर लेते हैं तो इस ग्रह पर जीवन के निशान स्पष्ट हो जाएंगे।

नासा वैज्ञानिक जेम्स लुईस ने प्रयोगशाला में जांच के बाद कहा, क्युरियोसिटी रोवर में लगे पोर्टबल लैब डाटा के आधार पर ऑगैनिक नमक के संकेत मिले हैं।

नासा के मुताबिक, इस ग्रह पर ऑर्गेनिक तत्वों व नमक प्रक्रिया की मौजूदगी जीवाणुओं के निशान तक हमें ले जा सकती है। नमक मिलने से मंगल पर पहले कभी ऑगैनिक सामग्री रहने की संभावना को बल मिलता है।

साथ ही आज भी वहां जीवन के मुमकिन होने की उम्मीद जगाती है। धरती पर ऐसा जीवन देखा गया है जो ऑगैनिक नमक, ऑग्जलेट और एसेटेट पर निर्भर होता है।

मंगल पर खोज के लिए ऑगैनिक मॉलिक्यूल मिलना नासा के लिए बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि इसके बाद ही यहां जैविक प्रक्रिया के साक्ष्य जुटाए जा सकेंगे। हालांकि मंगल की सतह पर रेडिएशन से ऑगैनिक सामग्री के खत्म होने की चुनौती भी पेश आ सकती है। 

मंगल की सतह पर ड्रिलिंग

नासा के गॉडार्ड अंतरिक्ष उड़ान केंद्र में ऑगैनिक वैज्ञानिक जेम्स लुईस ने बताया, अगर हम मंगल पर कहीं भी ऑगैनिक नमक का पता लगाते हैं तो हमें उन क्षेत्रों में और ज्यादा जांच की जरूरत पड़ेगी।

इसके लिए ग्रह की सतह के नीचे ड्रिलिंग की जरूरत पड़ सकती है जहां ऑगैनिक सामग्री सुरक्षित मिल सकती है। वैज्ञानिक यह पता लगा रहे हैं कि यह सामग्री कब तक इस ग्रह पर अपने निशान सुरक्षित रख सकती है। 

क्या है चुनौती?

क्युरियोसिटी रोवर में लगे उपकरण एसएएम के साथ मंगल पर नमक की भौगोलिक पुष्टि में मुश्किल आ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह उपकरण मंगल की मिट्टी और चट्टान को गर्म करता है जिससे गैसें उत्सर्जित होती हैं। ऐसे में ऑगैनिक नमक के गर्म होने से जो गैसें निकलेंगी, वे मंगल की मिट्टी में किसी भी दूसरी चीज से भी निकल सकती हैं।



Source