ब्लैक फंगस का कहर: 14 राज्यों में महामारी घोषित, जानें कहां मिले कितने मामले

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ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : अमर उजाला

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कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा देश अब म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस की चपेट में भी आता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में ही इस बीमारी ने हजाारों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। अभी तक हरियाणा, गुजरात, यूपी और पंजाब समेत करीब 14 राज्यों ने इस बीमारी को महामारी घोषित कर दिया है।

किस राज्य में कितने मामले
ब्लैक फंगस के सबसे ज्यादा मामले गुजरात में हैं यहां 2281 लोग ब्लैक फंगस की चपेट में आए हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र में 2000 मामले, आंध्र प्रदेश में 910 मामले, मध्यप्रदेश में 720, राजस्थान में 700, कर्नाटक में 500, दिल्ली में 197, यूपी में 124, तेलंगाना में 350, हरियाणा में 250, पश्चिम बंगाल में 6 और बिहार में 56 मामले सामने आए हैं। शनिवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक अस्पताल में इलाज के दौरान एक 32 वर्षीय महिला की ‘ब्लैक फंगस’  से मौत हो गई।

इन राज्यों में महामारी घोषित
कोरोना के मरीजों में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए हरियाणा, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, यूपी, पंजाब, गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान, ओडिशा, बिहार, चंडीगढ़, उत्तराखंड, तेलांगना समेत करीब 14 राज्यों में इस बीमारी को महामारी घोषित कर दिया गया है।

महामारी घोषित होने पर गाइडलाइंस का करना होता है पालन
बता दें कि जो राज्य किसी बीमारी को महामारी घोषित कर देते हैं फिर उन्हें केस, इलाज, दवा और बीमारी से होने वाली मौत का हिसाब रखना होता है। साथ ही सभी मामलों की रिपोर्ट चीफ मेडिकल ऑफिसर को देनी होती है। इसके अलावा केंद्र सरकार और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर की गाइडलाइंस का पालन करना होता है।

सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री से की ये अपील
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देश में ब्लैक फंगस के मामलों में बढ़ोतरी और जरूरी दवा की कथित कमी को लेकर चिंता प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि इस बीमारी के मरीजों को राहत प्रदान करने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाए जाएं।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में इस बात जिक्र भी किया कि केंद्र ने राज्यों से ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने के लिए कहा है। सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘महामारी घोषित करने का मतलब यह है कि इसके उपचार के लिए जरूरी दवाओं का पर्याप्त उत्पादन और आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है तथा मरीजों की मुफ्त देखभाल की जाए।’’

कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया, ‘एम्फोटेरीसिन-बी इस बीमारी के उपचार के लिए जरूरी दवा है। बहरहाल, ऐसी खबरें हैं कि बाजार में इस दवा की भारी कमी है।इसके साथ ही, यह बीमारी आयुष्मान भारत तथा कई अन्य बीमा के तहत कवर नहीं है।’ उन्होंने पीएम से अपील करते हुए कहा कि से ब्लैक फंगस से प्रभावित हो रहे बड़ी संख्या में मरीजों को राहत देने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।

केंद्र ने दवा के लिए पांच और कंपनियों को दिया लाइसेंस
बीमारी में बढ़ोतरी के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ब्लैक फंगस से उत्पन्न होने वाले रोग म्यूकरमाइकोसिस के उपचार में काम आने वाली दवा ‘एंफोटेरिसिन-बी’ के उत्पादन के लिए पांच और कंपनियों को लाइसेंस दिया गया है और वे जुलाई से हर महीने इस दवा की 1,11,000 शीशियों का उत्पादन शुरू करेंगी।

केंद्र ने म्यूकरमाइकोसिस के प्रसार को चिंता का कारण बताते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सलाह दी है कि वे फंगस संक्रमण को रोकने की अपनी तैयारियों और अस्पतालों में उपचार और स्वच्छता की समीक्षा करें।

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा देश अब म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस की चपेट में भी आता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में ही इस बीमारी ने हजाारों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। अभी तक हरियाणा, गुजरात, यूपी और पंजाब समेत करीब 14 राज्यों ने इस बीमारी को महामारी घोषित कर दिया है।

किस राज्य में कितने मामले

ब्लैक फंगस के सबसे ज्यादा मामले गुजरात में हैं यहां 2281 लोग ब्लैक फंगस की चपेट में आए हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र में 2000 मामले, आंध्र प्रदेश में 910 मामले, मध्यप्रदेश में 720, राजस्थान में 700, कर्नाटक में 500, दिल्ली में 197, यूपी में 124, तेलंगाना में 350, हरियाणा में 250, पश्चिम बंगाल में 6 और बिहार में 56 मामले सामने आए हैं। शनिवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक अस्पताल में इलाज के दौरान एक 32 वर्षीय महिला की ‘ब्लैक फंगस’  से मौत हो गई।

इन राज्यों में महामारी घोषित

कोरोना के मरीजों में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए हरियाणा, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, यूपी, पंजाब, गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान, ओडिशा, बिहार, चंडीगढ़, उत्तराखंड, तेलांगना समेत करीब 14 राज्यों में इस बीमारी को महामारी घोषित कर दिया गया है।


महामारी घोषित होने पर गाइडलाइंस का करना होता है पालन

बता दें कि जो राज्य किसी बीमारी को महामारी घोषित कर देते हैं फिर उन्हें केस, इलाज, दवा और बीमारी से होने वाली मौत का हिसाब रखना होता है। साथ ही सभी मामलों की रिपोर्ट चीफ मेडिकल ऑफिसर को देनी होती है। इसके अलावा केंद्र सरकार और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर की गाइडलाइंस का पालन करना होता है।

सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री से की ये अपील

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देश में ब्लैक फंगस के मामलों में बढ़ोतरी और जरूरी दवा की कथित कमी को लेकर चिंता प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि इस बीमारी के मरीजों को राहत प्रदान करने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाए जाएं।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में इस बात जिक्र भी किया कि केंद्र ने राज्यों से ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने के लिए कहा है। सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘महामारी घोषित करने का मतलब यह है कि इसके उपचार के लिए जरूरी दवाओं का पर्याप्त उत्पादन और आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है तथा मरीजों की मुफ्त देखभाल की जाए।’’

कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया, ‘एम्फोटेरीसिन-बी इस बीमारी के उपचार के लिए जरूरी दवा है। बहरहाल, ऐसी खबरें हैं कि बाजार में इस दवा की भारी कमी है।इसके साथ ही, यह बीमारी आयुष्मान भारत तथा कई अन्य बीमा के तहत कवर नहीं है।’ उन्होंने पीएम से अपील करते हुए कहा कि से ब्लैक फंगस से प्रभावित हो रहे बड़ी संख्या में मरीजों को राहत देने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।

केंद्र ने दवा के लिए पांच और कंपनियों को दिया लाइसेंस

बीमारी में बढ़ोतरी के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ब्लैक फंगस से उत्पन्न होने वाले रोग म्यूकरमाइकोसिस के उपचार में काम आने वाली दवा ‘एंफोटेरिसिन-बी’ के उत्पादन के लिए पांच और कंपनियों को लाइसेंस दिया गया है और वे जुलाई से हर महीने इस दवा की 1,11,000 शीशियों का उत्पादन शुरू करेंगी।

केंद्र ने म्यूकरमाइकोसिस के प्रसार को चिंता का कारण बताते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सलाह दी है कि वे फंगस संक्रमण को रोकने की अपनी तैयारियों और अस्पतालों में उपचार और स्वच्छता की समीक्षा करें।



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