अब प्रांतों को संभालने पर तालिबान की नजर, 17 गवर्नरों और 10 पुलिस आयुक्तों को किया अपॉइंट

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तालिबान (Taliban) ने अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद वहां अब नियुक्तियां शुरू की हैं. तालिबान ने 17 गवर्नर्स, 15 डिप्टी गवर्नर्स और 10 पुलिस आयुक्तों की नियुक्ति की है.  टोलो न्यूज के मुताबिक, तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा, तालिबान के नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदजादा की रजामंदी के बाद ही नई नियुक्तियां की गई हैं. नए गवर्नर्स, डिप्टी प्रांतीय गवर्नर्स  और प्रांतीय पुलिस आयुक्तों को बदखाशन, बघलान, बामयान, बल्ख, कुंदुज, कुनार, लोगर, लगमन, दाइकुंडी, फराह, फरयाब, गजनी, जजजान, काबुल, मैदान वार्डक, सारे पुल, नीमरोज, पक्तिया, पक्तिका, उत्जगन और ज़ाबुल में नियुक्त किए गए हैं. 

इससे पहले रूस की न्यूज एजेंसी स्पूतनिक के मुताबिक, तालिबान नेतृत्व ने आंदोलन में दल-बदलू और घुसपैठियों को लेकर लिखित में लोगों को संदेश जारी किया था. संगठन ने अपने कमांडरों से ऐसे लड़कों को हटाने को कहा था, जो काम करने लायक नहीं हैं. बता दें कि अगस्त के मध्य में तालिबान ने धीरे-धीरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था. पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए थे. तालिबान ने अफगानिस्तान का नया नाम एमिरेट्स ऑफ अफगानिस्तान रखा था. 

महिलाओं की हत्या मामले में दो गिरफ्तार

गौरतलब है कि अफगानिस्तान के उत्तरी इलाके में पिछले सप्ताह नागरिक समाज कार्यकर्ता और तीन अन्य महिलाओं की हत्या के मामले में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है. इन चारों पीड़ितों का शव उनके घरों में मिला था. यह जानकारी तालिबान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और मृतक कार्यकर्ता के सहकर्मी ने शनिवार को दी. तालिबान की सरकार में गृह मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद खोस्ती ने ट्विटर पर जारी वीडियो में बताया कि संदिग्धों ने स्वीकार किया है कि मजारा ए शरीफ शहर के घर में रहने वाली इन महिलाओं के प्रति वे आसक्त हो गए थे. 

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि क्या आरोपियों ने इन हत्याओं की बात भी स्वीकार की है. प्रवक्ता ने न तो हत्या की वजह बताई और न ही आरोपियों की पहचान जाहिर की. उन्होंने बताया कि मामले को सुनवाई के लिए अदालत भेजा गया है. स्थानीय कला केंद्र के मुताबिक एक पीड़िता 29 वर्षीय फिरोजन सैफी हैं जो वहां काम करती थीं. जैनुद्दीन मोहम्मद बाबर संस्कृति केंद्र के निदेशक सैयद अजीम सदात ने बताया कि सैफी अफगानिस्तान छोड़ना चाहती थीं, क्योंकि वह तालिबान के प्रतिबंध वाले शासन में अपने भविष्य को लेकर भयभीत थी. वह अपने मंगेतर जो एक कार्यकर्ता भी हैं के पास जाना चाहती थी जो पहले ही देश छोड़कर जा चुके हैं.

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