गूगल की नीति में बदलाव: ऑनलाइन बदनामी का डर दिखाकर वसूली नहीं कर पाएंगी फर्जी साइट, पीड़ित की मांग पर नतीजे छिपा दिए जाएंगे

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वॉशिंगटनएक घंटा पहले

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डेविड ग्रैफ

  • टेक दिग्गज कंपनी सर्च अल्गोरिदम बदलेगी, नुकसानदायक कंटेंट पर रोक में मिलेगी मदद

इंटरनेट पर फर्जी शिकायत और आपत्तिजनक कंटेंट के जरिए यूजर्स को बदनाम करना आम बात है। कई वेबसाइट कथित धोखेबाजों, यौन हिंसा करने वालों के बारे में असत्यापित शिकायतें देने के लिए उकसाती हैं। कई लोग इसका इस्तेमाल दुश्मनों को बदनाम करने के लिए भी करते हैं। इससे सर्च में पीड़ितों के नाम की गुमनाम पोस्ट की झड़ी लग जाती है। पीड़ितों की पोस्ट गूगल सर्च के नतीजों में उच्च स्तर पर दिखने लगती हैं। इन पोस्टों को नीचे ले जाने के लिए यूजर्स से हजारों डॉलर मांगे जाते हैं। बरसों से बदनामी का ये सिलसिला जारी है।

वेबसाइटों और बिचौलियों के लिए यह काफी फायदेमंद रहा है। पर अब गूगल इस पर लगाम कसने की तैयारी में है। इसके लिए गूगल अपने सर्च अल्गोरिदम को बदलने की योजना बना रहा है। इससे प्रीडेटर्सअलर्टडॉटयूएस और बेडगर्लरिपोर्टडॉटडेट जैसे डोमेन के तहत काम करने वाली वेबसाइट को दिखने से रोका जा सकेगा। जब यूजर्स किसी के नाम से सर्च करते हैं, तब ये साइट दिखने लगती हैं। इससे आगे गूगल ने हाल में नया कंसेप्ट ‘नोन विक्टिम्स’ बनाया है।

जब यूजर शिकायत करते हैं कि साइट्स पर उनसे जुड़ी पोस्ट हटाने के लिए पैसों की मांग की गई है। तब गूगल पीड़ितों के नाम से जुड़े कंटेट को अपने आप दबा देगा। पीड़ित अपने नाम से जुड़े नतीजों को छिपाने का अनुरोध भी कर सकते हैं। गूगल में ग्लोबल पॉलिसी, स्टैंडर्ड्स, ट्रस्ट एंड सेफ्टी के वाइस प्रेसिडेंट डेविड ग्रैफ कहते हैं कि मुझे संदेह है कि यह श्रेष्ठ समाधान है, पर लगता है कि इसका महत्वपूर्ण और सकारात्मक प्रभाव जरूर होगा।

अमेरिका में 41% वयस्कों को ऑनलाइन प्रताड़ना झेलनी पड़ी: अमेरिका में 41% वयस्कों को ऑनलाइन प्रताड़ना या दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है। प्यू रिसर्च की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। सोशल मीडिया पर टैक्स्ट मैसेज के जरिए यह दुर्व्यवहार तेजी से बढ़ा है। इसमें धमकी देना, अभद्र भाषा, आपत्तिजनक कंटेंट साझा करना जैसे तरीकों का इस्तेमाल शामिल है।

गूगल ने कहा था-सर्च रिजल्ट निष्पक्ष होते हैं, एक दशक बाद बयान बदल दिया

गूगल ने एक दशक पहले कहा था कि हमारे सर्च रिजल्ट पूरी तरह से निष्पक्ष होते हैं। गूगल में काम करने वालों की प्राथमिकताओं से ये पूरी तरह मुक्त होते हैं। एक दशक बाद यह बयान डिलीट कर नया बयान दिया गया। इसमें कंपनी ने कहा कि हम सिर्फ उन्हीं साइटों को हटाते हैं, जिन्हें हटाने के लिए कानूनी रूप से मजबूर हैं। या वे दुर्भावनापूर्ण तरीकों से नतीजों में हेरफेर करने की कोशिश करती हैं। सर्च रिजल्ट में गूगल की शुरुआती दखल पाइरेटेड फिल्मों, संगीत तक सीमित थी, जो कॉपीराइट कानूनों के लिए जरूरी भी था। हाल के वर्षों में गूगल ने लोगों के सर्च रिजल्ट को साफ-सुथरा बनाने में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की है।

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