पाकिस्तान को झटका: तालिबान ने आपसी कारोबार के लिए पाकिस्तानी रुपए के इस्तेमाल से इनकार किया; कहा- हम अपने हित जरूर देखेंगे

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काबुलएक घंटा पहले

अफगानिस्तान में तालिबान हुकूमत आने के बाद पाकिस्तान सरकार हर मुद्दे पर उसका मार्गदर्शक बनने की कोशिश कर रही है। लेकिन, तालिबान उसको हर मुद्दे पर झटके दे रहे हैं। एयरपोर्ट, सिक्योरिटी के बाद अब बाइलेट्रल ट्रेड यानी आपसी कारोबार के मुद्दे पर भी तालिबान ने पाकिस्तान का ऑफर ठुकरा दिया है। पाकिस्तान की इमरान सरकार ने कहा था कि वो अफगानिस्तान से पाकिस्तानी रुपए में ट्रेड करने के लिए तैयार है। तालिबान ने इससे इनकार करते हुए कहा है कि वो अपने हितों को देखते हुए फैसले लेंगे, क्योंकि ये उनके लिए सम्मान का प्रश्न भी है।

बात कहां से शुरू हुई
पिछले दिनों पाकिस्तान के वित्त मंत्री शौकत तरीन ने संसद में और इसके बाहर कहा था कि वो अफगानिस्तान की नई हुकूमत के साथ मजबूत कारोबारी रिश्ते चाहते हैं और इसके लिए पाकिस्तान की करंसी को इस्तेमाल करना चाहते हैं। तरीन ने ये भी कहा था कि दोनों देश इस करंसी का इस्तेमाल आर्थिक हालात सुधारने के लिए कर सकते हैं। तालिबान ने तीन दिन चुप रहने के बाद इसका जवाब दिया।

तालिबान नेता और अहमदउल्ला वासिक ने न्यूज एजेंसी से कहा- हम साफ कर देना चाहते हैं कि आपसी कारोबार तो हमारी मुद्रा यानी अफगानीस में ही होगा। करंसी को नहीं बदला जाएगा। हम अपनी पहचान का महत्व समझते हैं और इसे बनाए रखेंगे। इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

इसी साल जून में तालिबान के कुछ नेताओं ने पाकिस्तान का दौरा किया था। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी खुद इन नेताओं को रिसीव करने के लिए मौजूद थे।

मजबूरी का फायदा उठाने की फिराक में पाकिस्तान
शौकत तरीन ने पिछले हफ्ते कहा था- अफगानिस्तान के पास अभी डॉलर्स की दिक्कत है। अमेरिका ने उसके 9 अरब डॉलर के फंड ब्लॉक कर दिए हैं। इसलिए यही बेहतर होगा कि अफगानिस्तान और हम मिलकर पाकिस्तानी रुपए में कारोबार करें। इसके लिए करंसी बदलने का रास्ता अपनाया जा सकता है। पाकिस्तान के कारोबारियों ने तरीन के इस प्रस्ताव का स्वागत किया था।

अगस्त में पाकिस्तान रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले 164 रुपए करीब थी। अब यह लगभग 169 हो चुकी है। कुछ जानकारों का मानना है कि अफगानिस्तान से स्मगलिंग के जरिए काफी चीजें पाकिस्तान आती हैं और इसकी वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है।

तालिबान को पाकिस्तान में ज्यादा रुचि क्यों नहीं
कुछ दिन पहले पाकिस्तान ने काबुल एयरपोर्ट को फिर से तैयार करने और उसके ऑपरेशन्स शुरू करने का ऑफर दिया था। तालिबान ने पाकिस्तान को तवज्जो नहीं दी। इसका काम तुर्की और कतर को दे दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने तालिबान को एडमिनिस्ट्रेशन में मदद का प्रस्ताव दिया। तालिबान ने यह ऑफर ये कहते हुए ठुकरा दिया कि वो अपने हिसाब से काम करेगा।

पाकिस्तान की सीनियर जर्नलिस्ट आलिया शाह ने पिछले दिनों अपने यूट्यूब चैनल पर कहा था कि तालिबान बहुत सोच समझकर काम कर रहे हैं। उनको लगता है कि अगर पाकिस्तान के साथ ज्यादा नजर आएंगे तो इसकी वजह से पश्चिमी देश उनको आर्थिक तौर पर मदद देने में पीछे हट सकते हैं।

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