महिला सशक्तिकरण में आगे बढ़ा ब्रिटेन: 500 साल में पहली बार रॉयल नेवी को मिली महिला रियर एडमिरल; 47 साल की जूड टेरी ने हासिल किया मुकाम

0
33
Article Top Ad


  • Hindi News
  • International
  • British Royal Navy Received Female Rear Admiral; Inspired By Father, This Position In His Career Of Only 19 Years

लंदन9 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

47 वर्षीय जूड टेरी ब्रिटेन की नौसेना की पहली महिला रियर एडमिरल होंगीं।

ब्रिटेन की नौसेना (रॉयल नेवी) ने पहली महिला रियर एडमिरल के नाम की घोषणा कर दी है। नौसेना की 500 साल की सेवा में पहली बार किसी महिला को रियर एडमिरल बनाया गया है। अब कमोडोर जूड टेरी (47) इस पद होंगी। जूड अगस्त 2022 से यह पद संभालेंगी।

यह पद आर्मी के मेजर जनरल और एयरफोर्स के वाइस मार्शल के बराबर है। ब्रिटेन में आर्मी और एयरफोर्स में पहले से ही इन पदों पर महिलाएं हैं। बतौर रियर एडमिरल जूड पर नौसैनिकों, नाविकों की नियुक्ति और सेवानिवृत्ति के कार्यों की जिम्मेदारी होगी। वे नौसैनिकों और नाविकों के प्रशिक्षण, कल्याण और करियर प्रबंधन की देखरेख करेंगी।जूड नौसेना के परिवहन जहाज एचएमएस ओशियन में तैनात थीं। यह जहाज ब्रिटिश नौसेना के हेलीकॉप्टरों का लैंडिंग प्लेटफॉर्म है। जूड चैनल-4 के युद्धपोतों की शृंखला का निर्माण करने वाली टीम की प्रमुख रह चुकी हैं। उनका नौसेना का करियर 19 साल का है। वे रॉयल नेवी लॉजिस्टिक्स ऑफिसर से लेकर डिप्टी डायरेक्टर ऑफ पीपल डिलीवरी तक के पदों पर रहीं।

2017 में ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर से नवाजा जा चुका

उन्हें 2017 में नौसेना के बड़े सम्मान ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (ओबीई) से नवाजा गया था। सेना के जरिए देश की सेवा की प्रेरणा उन्हें पिता से मिली। जूड के पिता रॉबिन रॉयल नेवी के जहाज एचएमएस टाइगर में अधिकारी थे। जूड ने यूनिवर्सिटी ऑफ डंडी से 1997 में ग्रेजुएशन किया है। वे डिफेंस स्टडी में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। रॉयल नेवी में अभी 30 हजार अधिकारी-कर्मचारी हैं।

इनमें से 12% महिलाएं हैं। साल 2030 तक इसे बढ़ाकर 20% करना है। बता दें कि रियल एडमिरल का पद वाइस एडमिरल और एडमिरल से नीचे होता है। लेकिन यह कैप्टन और कमोडर से ऊंचा पद है। भारतीय नौसेना में भी रॉयल नेवी की तरह ही कमीशन अधिकारियों के पद हैं। साल 2019 के आंकड़ों के मुताबिक रॉयल नेवी में 34 एडमिरल, वाइस एडमिरल ओर रियर एडमिरल हैं।

जूड ने कहा- मैं इस सम्मान से खुश हूं, मेरे साथ कभी भेदभाव नहीं हुआ

जूड ने कहा- ‘मैं इस सम्मान से खुश हूं। नौसेना में मुझे मेरी पहचान का हमेशा सम्मान मिला। मुझसे महिला होने के नाते कभी भेदभाव नहीं किया गया। निश्चित ही हमें हमारे काम का फल कभी न कभी मिल ही जाता है। मैं अपनी सफलता में अपनी मां और बहन का सबसे बड़ा योगदान मानती हूं। उन्होंने मुझे सही राह दिखाई। मैं सेना को समाज के प्रति ज्यादा उत्तरदायी बनाने की मंशा रखती हूं।’

खबरें और भी हैं…



Source