PAK पीएम Vs आर्मी चीफ: इमरान खान बोले- आर्मी चीफ बाजवा को एक्सटेंशन पर अभी विचार ही नहीं किया, वक्त आएगा तो सोचेंगे

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इस्लामाबाद33 मिनट पहले

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान एक बार फिर उसी फौज से टकराने की कोशिश कर रहे हैं, जिसने उन्हें सत्ता तक पहुंचाया। इमरान ने कहा है कि उन्होंने अब तक आर्मी चीफ जनरल बाजवा के एक्सटेंशन पर विचार तक नहीं किया है। बाजवा का कार्यकाल नवंबर में खत्म हो रहा है। इसके पहले इमरान और आर्मी चीफ के बीच पूर्व ISI चीफ जनरल फैज हमीद के ट्रांसफर को लेकर विवाद हुआ था। इमरान अपने राजदार जनरल फैज का ट्रांसफर नहीं चाहते थे, जबकि बाजवा उन्हें पेशावर का कोर कमांडर बनाना चाहते थे। जीत बाजवा की हुई थी और फैज को पेशावर जाना पड़ा था।

इमरान ने क्या कहा
‘द डॉन’ ने शुक्रवार को इमरान खान का एक बयान जारी किया। इसकी काफी चर्चा हो रही है। इसकी वजह यह है कि अमूमन प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति आर्मी या ISI चीफ की नियुक्तियों से जुड़े मामलों पर सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी नहीं करते। लेकिन, इमरान इस मामले में भी अलग रास्ता अख्तियार कर रहे हैं। खान ने कहा- नया साल तो अभी शुरू ही हुआ है। नवंबर तो काफी दूर है। तो फिर लोग आर्मी चीफ के एक्सटेंशन को लेकर फिक्रमंद क्यों हुए जा रहे हैं।

इमरान की दाईं तरफ पूर्व ISI चीफ जनरल फैज और बाईं तरफ जनरल बाजवा। (फाइल)

इमरान की दाईं तरफ पूर्व ISI चीफ जनरल फैज और बाईं तरफ जनरल बाजवा। (फाइल)

अब बाजवा का मामला समझिए
आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा की उम्र 61 साल है। 28 नवंबर 2022 को उनका रिटायरमेंट है। बाजवा को बतौर आर्मी चीफ 3 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद वास्तव में 29 नवंबर 2019 को ही रिटायर होना था, लेकिन इमरान को सत्ता में उन्होंने ही पहुंचाया था, लिहाजा उन्हें 3 साल का ही एक्सटेंशन और दे दिया गया। यह संविधान के खिलाफ था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने एक्सटेंशन का पीरिएड 3 साल की बजाए सिर्फ 6 महीने कर दिया। इसके बाद इमरान सरकार ने संसद में एक कानून पास कराया और आर्मी चीफ की रिटायरमेंट ऐज यानी उम्र 64 साल कर दी। बाजवा अभी 61 साल के हैं और ऐसे में वो एक एक्सटेंशन और पाकर 3 साल पद पर बने रह सकते हैं। लेकिन, उनके एक्सटेंशन को हरी झंडी प्रधानमंत्री इमरान खान ही देंगे।

तो फिर दिक्कत कहां
पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि मुल्क में कोई भी सरकार सिर्फ तभी तक सत्ता में रह सकती है, जब तक उसे बेहद ताकतवर फौज और ISI का समर्थन हासिल हो। इमरान को हमेशा विपक्ष ने इलेक्टेड के बजाए सिलेक्टेड वजीर-ए-आजम कहा। उसका आरोप है कि 2018 के चुनाव में फौज और ISI की धांधली की वजह से इमरान प्रधानमंत्री बन पाए।

पिछले ISI चीफ फैज हमीद के ट्रांसफर के मुद्दे पर इमरान और जनरल बाजवा के रिश्ते खराब हो गए। फैज और इमरान करीबी दोस्त हैं। बाजवा ने जब फैज के ट्रांसफर का लेटर इमरान के पास दस्तखत के लिए भेजा तो इमरान ने इसे रोक लिया। बाजवा इस नाफरमानी से खफा हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजवा ने जब नतीजे भुगतने की धमकी दी तो इमरान ने मजबूरी में सिग्नेचर कर दिए, लेकिन इसके बाद से दोनों के रिश्तों में खटास आ गईं। इसलिए अब लोगों को इस बात का इंतजार है कि इमरान जनरल बाजवा को नया एक्सटेंशन देते हैं या नहीं। ये काम मार्च के पहले किया जाना है।

बाजवा का कार्यकाल नवंबर तक है, लेकिन एक्सटेंशन का फैसला मार्च तक होना है। (फाइल)

बाजवा का कार्यकाल नवंबर तक है, लेकिन एक्सटेंशन का फैसला मार्च तक होना है। (फाइल)

नवाज की मुल्क वापसी जल्द
फौज का नाराज कर चुके इमरान की फिक्र उन रिपोर्ट्स ने और बढ़ा दी, जिनमें कहा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ जल्द लंदन से पाकिस्तान लौट रहे हैं। कहा जा रहा है कि कोर्ट से चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दिए जा चुके शरीफ और फौज के बीच डील हो चुकी है। फौज और अदालत की मदद से वो अपने केस खत्म कराएंगे और फिर चुनाव लड़ेंगे। इमरान सरकार के कुछ मंत्री भी नवाज के संपर्क में बताए जा रहे हैं। लंदन में उनकी शरीफ से मुलाकात के कुछ वीडियोज भी सामने आए थे।

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